Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: क़ानूनी विषय: इंसाफ़:

 क़ानूनी विषय:


इंसाफ़ करना:


ईमानवालो! तुम इंसाफ़ से काम लिया करो, और अल्लाह के लिए (सच्ची) गवाही देने वाले बनो, चाहे मामला ख़ुद तुम्हारे विरुद्ध हो, या तुम्हारे माँ-बाप और रिश्तेदारों के विरुद्ध ही क्यों हो, चाहे आदमी अमीर हो या ग़रीब, अल्लाह दोनों की बेहतर देखभाल कर सकता है। अपनी इच्छाओं के पीछे चलने से बचो, ताकि तुम इंसाफ़ से काम ले सको ---  (गवाही के समय) अगर इंसाफ़ से छेड़-छाड़ करोगे या उसे नज़रअंदाज़ करोगे, तो जो कुछ तुम करते हो, (याद रखो) अल्लाह को उसकी पूरी ख़बर रहती है।  (4: 135)

 

ईमानवालो! तुम अल्लाह की भक्ति में मज़बूती से जमे रहो और निष्पक्ष होकर गवाही देने वाले बनो: ऐसा नहीं होना चाहिए कि दूसरों के प्रति नफ़रत तुम्हें इस बात पर उभार दे कि तुम न्याय करना छोड़ दो। बल्कि हर हाल में न्याय करो, कि यह अल्लाह का डर रखने के ज़्यादा निकट है। अल्लाह से डरते रहो: जो कुछ भी तुम करते हो, अल्लाह उसकी ख़बर रखता है।  (5: 8)

 

 बेशक अल्लाह (सबके साथ) न्याय करने का, भलाई करने का और रिश्तेदारों को (उनके हक़) देते रहने का आदेश देता है और गंदी अश्लील बातों से, हर तरह की बुराइयों से और अत्याचार ज़्यादती करने से रोकता है। वह तुम्हें नसीहत करता है, ताकि तुम ध्यान दो समझो। (16: 90)

 अल्लाह के नाम से अगर कोई प्रतिज्ञा करो, तो उसे पूरा किया करो  और (इसी तरह) अगर किसी चीज़ की पक्की शपथ ले लो तो उसे मत तोड़ो, क्योंकि तुम अल्लाह को अपना गवाह बना चुके हो: अल्लाह हर एक चीज़ जानता है जो कुछ तुम करते हो। (16: 91)

 

[ रसूल!], लोग आपसे औरतों के क़ानून के बारे में पूछते हैं, आप कह दें, "अल्लाह ख़ुद ही तुम्हें उनसे जुड़े क़ानून बताता है। तुम्हारे सामने पहले ही हमारी किताब [क़ुरआन] की वह आयतें पढ़कर सुनायी जा चुकी हैं, जो उन अनाथ लड़कियों के बारे में हैं [जो तुम्हारी देख-रेख में हैं], जिनकी (विरासत का) निर्धारित हिस्सा तुम अदा नहीं करते और (इसीलिए) उनके साथ शादी कर लेना चाहते हो, और (इसी तरह) बेसहारा बच्चों के बारे में भी आदेश है ------ अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि अनाथों के साथ इंसाफ़ से पेश आओ: जो कुछ भलाई का काम तुम करते हो, अल्लाह उसे अच्छी तरह जानता है।" (4: 127)


[ रसूल], हमने आप पर यह किताब सच्चाई के साथ उतार भेजी है, ताकि जैसा अल्लाह ने आपको बता दिया है, उसी के मुताबिक़ आप लोगों के बीच फ़ैसला करें। आप उन लोगों की वकालत करें जिन्होंने भरोसे को तोड़ डाला है। (4: 105)

 अल्लाह से माफ़ी चाहें : वह बहुत माफ़ करनेवाला, दयावान है। (4: 106)

 आप ऐसे लोगों की वकालत करें जो ख़ुद अपनी जानों के साथ विश्वासघात करते हैं: अल्लाह ऐसे किसी आदमी को पसंद नहीं करता, जो धोखा देने और गुनाह करने में लगा हो।  (4: 107)

वे लोगों से अपने आपको छिपाने की कोशिश करते हैं, मगर वे अल्लाह से नहीं छिप सकते। अल्लाह तो उस समय भी उनके साथ मौजूद होता है, जब वे रातों में शैतानी योजनाएं बनाते हैं, और ऐसी बातें करते हैं जो अल्लाह को पसंद नहीं: जो कुछ भी वे करते हैं, वह अल्लाह के ज्ञान के घेरे से बाहर नहीं।  (4: 108)

(ईमानवालो), इस दुनिया में तो तुम इन लोगों की तरफ़ से बहस कर रहे हो, मगर क़यामत के दिन उनकी तरफ़ से अल्लाह के साथ कौन बहस करेगा? उनके बचाव में कौन होगा? (4: 109)

 तब भी, जो कोई बुरा कर्म करे या अपने हाथों अपना नुक़सान कर बैठे, और फिर अल्लाह से माफ़ी की प्रार्थना करे, तो वह अल्लाह को बड़ा माफ़ करनेवाला, बेहद दयावान पाएगा।  (4: 110)

 वह जो गुनाह के काम करता है, तो वह अपनी ही जान पर ज़ुल्म करता है----- अल्लाह सब जाननेवाला, (और हर काम में) बहुत समझ-बूझ रखनेवाला है---  (4: 111)

 अगर कोई आदमी जुर्म करता है, या गुनाह करता है, और फिर उसका इल्ज़ाम किसी निर्दोष आदमी पर थोप देता है, तो उसने एक बड़े धोखे और भारी गुनाह का बोझ अपनी गर्दन पर डाल लिया। (4: 112)

 

अल्लाह तुम (लोगों) को आदेश देता है कि तुम्हारे पास अगर किसी की अमानतें [Deposits] हों, तो उसे उसके सही हक़दारों को वापस कर दो, और, जब लोगों के बीच फ़ैसला करो, तो इंसाफ़ करो: अल्लाह ने तुम्हें जो नसीहतें दी हैं, सब कितनी अच्छी हैं, क्योंकि अल्लाह सब कुछ सुनता, सब देखता है। (4: 58)

 

और अल्लाह तुम्हें इस बात से नहीं रोकता कि तुम किसी के साथ अच्छा व्यवहार करो, और उसके साथ इंसाफ़ करो जिसने तुम से धर्म [Faith] के नाम पर युद्ध नहीं किया और तुम्हें तुम्हारे घरों से निकाल बाहर किया: अल्लाह न्याय करनेवालों को पसन्द करता है। (60: 8)

मगर अल्लाह तो तुम्हें केवल उन लोगों को अपना दोस्त बनाने से रोकता है जिन्होंने धर्म के नाम पर तुम से युद्ध किया, तुम्हें तुम्हारे घरों से निकाल बाहर किया, और तुम्हें निकलवाने में दूसरों की मदद की: तुममें से कोई भी अगर इन्हें अपना सहयोगी बनाता है, तो वह सचमुच ही ज़ालिमों में होगा। (60: 9)

 

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