Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: क़ुरआन के क़िस्से: सामरी और सुनहरा बछड़ा:
क़ुरआन के क़िस्से:
सामरी और सुनहरा बछड़ा:
[मूसा अपनी क़ौम को हारून की निगरानी में छोड़कर तूर पहाड़ पर ध्यान लगाने आए थे, तब अल्लाह ने कहा], "ऐ मूसा! अपनी क़ौम को पीछे छोड़कर तुझे इतनी जल्दी यहाँ आने पर किस चीज़ ने उभारा?" (20: 83)
उसने कहा, "वे मेरे मार्ग का अनुसरण करते हुए पीछे-पीछे चले आ रहे हैं, ऐ रब! मैं तेरे पास लपककर आ गया, ताकि तू ख़ुश हो जाए।" (20: 84)
लेकिन अल्लाह ने कहा, "तेरी अनुपस्थिति में हमने तेरी क़ौम के लोगों की परीक्षा ली: सामरी ने उन्हें बहका दिया है।" (20: 85)
तब मूसा बेहद ग़ुस्सा और दुखी मन से अपनी क़ौम के लोगों के पास वापस गया। उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! क्या तुम्हारे रब ने तुम से अच्छा वादा नहीं किया था? क्या इस बात को हुए बहुत लम्बा समय गुज़र गया था या तुम यही चाहते ही थे कि तुम पर तुम्हारे रब का ग़ुस्सा टूट पड़े? इसीलिए तुमने मुझ से किए हुए वादे को तोड़ डाला?" (20: 86)
उन लोगों ने कहा, "हमने आप से किए हुए वादे को जान-बूझकर नहीं तोड़ा, बल्कि असल में (मिस्र से निकलते समय) लोगों के पास भारी भारी ज़ेवर थे जिसके बोझ तले हम दबे हुए थे, (और फिर सफ़र की मुसीबतों से बचने व ईमान की सफ़ाई के लिए ज़ेवरों को फेंक देना तय हुआ), अत: हमने उनको फेंक दिया था, और सामरी ने (उन्हें जमा करके आग में) डाल दिया था।" (20: 87)
फिर सामरी ने उस (पिघले हुए ज़ेवरों) से एक बछड़े की मूर्ति बना दी, जिसमें से गाय के पुकारने जैसी आवाज़ आती थी, और लोग देखकर कहने लगे, "यही तुम्हारा ख़ुदा है और मूसा का भी ख़ुदा यही है, मगर वह [मूसा] भूल गए हैं।" (20: 88)
क्या उन्होंने नहीं देखा था कि वह (बछड़ा आवाज़ तो निकालता है, पर) उनकी किसी बात का जवाब नहीं देता था, और यह कि उसमें न तो किसी को कोई नुक़सान पहुँचाने की ताक़त थी और न फ़ायदा? (20: 89)
हारून ने हालाँकि उन्हें बता दिया था, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यह बछड़ा तुम लोगों के लिए एक परीक्षा है, तुम्हारा असल रब तो रहम करनेवाला रब [रहमान] है, अतः तुम मेरे पीछे चलो, और मेरा आदेश मानो।" (20: 90)
मगर उन्होंने जवाब दिया, "जब तक मूसा लौटकर हमारे पास न आ जाएं, तब तक हम इसकी भक्ति करना नहीं छोड़ेंगे।" (20: 91)
मूसा ने कहा, "ऐ हारून! जब तुम समझ गए कि ये पथभ्रष्ट हो चुके हैं, तो किस चीज़ ने तुम्हें रोके रखा था, (20: 92)
मेरे पीछे-पीछे चले आने से? तुम मेरे आदेश की अवहेलना कैसे कर सकते हो?" (20: 93)
हारून ने कहा, "ऐ मेरी माँ के बेटे! मेरी दाढ़ी और मेरा सिर न नोच!---- मुझे डर था कि तू कहेगा, “तूने इसराईल की सन्तान में फूट डाल दी और मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया।" (20: 94)
(मूसा ने) कहा, "और ऐ सामरी! तेरा क्या मामला था?" (20: 95)
उसने जवाब दिया, "मैंने कुछ ऐसा देखा था, जो इन लोगों ने नहीं देखा; मैंने रसूल की कुछ शिक्षाएं तो ली थीं, मगर फिर उन्हें (अपने मन से) निकालकर एक तरफ़ डाल दिया: मेरे जी ने ही मुझे ऐसा करने के लिए उकसाया था।" (20: 96)
मूसा ने कहा, "चला जा यहाँ से! अब इस जीवन में तेरे लिए यही है कि तू कहता रहे, “मत छूओ मुझे!” मगर हाँ, तेरे लिए (अल्लाह के सामने हाज़िर होने का) एक निश्चित समय तय किया हुआ है, जिससे बच निकलने का कोई रास्ता नहीं है। देख अपने इस प्रभु को जिसकी भक्ति में तू जमा बैठा था---- हम इसे चूर-चूर करके दरिया में बिखेर देंगे।" (20: 97)
“[लोगो] तुम्हारा असल ख़ुदा तो बस एक अल्लाह है, जिसके अलावा कोई पूजने के लायक़ नहीं----- उसके ज्ञान ने हर चीज़ को घेर रखा है।" (20: 98)
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