Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: क़ुरआन के क़िस्से: हारूत और मारूत:

 क़ुरआन के क़िस्से:


हारूत और मारूत:


जब अल्लाह ने उनके पास एक रसूल [ईसा] भेजाजो उस किताब [तोरात] की पुष्टि करता था जो उनके पास पहले से थीतो उनमें से कुछ लोगों नेजिन्हें पहले किताब मिली थीअल्लाह की किताब को इस तरह अपने पीठ पीछे डाल दिया मानो वे कुछ जानते ही थे,  (2: 101)


और इसकी जगहवे उस (जादू-मंतर) के पीछे चलने लगे जिसे शैतानों ने सुलैमान [Solomon] की बादशाही के ज़माने में गढ़ लिया था। ऐसा नहीं था कि सुलैमान ने ख़ुद (सच्चाई को मानने से) इंकार [कुफ़्र] किया होअसल में कुफ़्र तो शैतानों ने किया था। वे लोगों को जादू-टोना और जो कुछ बाबिल [Babylon] में दो फ़रिश्तों हारूत और मारूत पर उतरा थाउसे सिखाते थे। हालाँकि इन दोनों ने कभी किसी को बिना पहले सावधान किए हुए कुछ नहीं सिखायावे (पहले ही यह बता देते थे कि), "हमें तो केवल बहकाने के लिए भेजा गया है---- तुम (सच्चाई से) इंकार [कुफ़्र] कर बैठो।इन्हीं दोनों (फ़रिश्तों) से उन लोगों ने यह सीखा कि कैसे मियाँ-बीवी के बीच झगड़ा पैदा किया जा सकता हैहालाँकि वे इसके द्वारा किसी को नुक़सान नहीं पहुँचा पाते थेसिवाय इसके कि जब अल्लाह की यही मर्ज़ी हो। उन्होंने (जादू-टोने की) वह चीज़ें तो सीखीं जिससे उन्हें नुक़सान पहुँचामगर (अल्लाह की किताब की) वह चीज़ें नहीं सीखीं जिससे उन्हें फ़ायदा पहुँचतायह जानते हुए भी कि जिस किसी ने (जादू-टोने का ज्ञान) सीखाउसके लिए आनेवाली दुनिया (की बरकतों) में कोई हिस्सा नहीं होगा। काश! कि वे जान पाते कि कितने घटिया (दाम पर) उन्होंने अपनी जानों को बेच डाला! (2: 102)


अगर उन्होंने (सच्चाई पर) विश्वास किया होता और वे अल्लाह से डरते हुए बुराइयों से बचतेतो अल्लाह की तरफ़ से मिलने वाला बदला कहीं ज़्यादा अच्छा होताकाश कि वे इस (सच्चाई को) जानते! (2: 103)

 

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