Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन : क़ुरआन के क़िस्से: यूनुस अलै. [Jonah]:
क़ुरआन के क़िस्से:
यूनुस अलै. [Jonah]:
काश कि कोई एक भी बस्ती ऐसी होती जिसने (यातना के आने से पहले ही) विश्वास किया होता, और उसका ईमान उसके लिए फ़ायदेमंद सिद्ध होता! हाँ, केवल यूनुस [Jonah] की क़ौम के लोगों ने ही (यातना से पहले) ऐसा किया, जब उन लोगों ने विश्वास कर लिया, तो हमने उस अपमानजनक यातना को उन पर से टाल दिया जो सांसारिक जीवन में आने वाली थी, और उन्हें एक अवधि तक ज़िन्दगी के मज़े उठाने का अवसर प्रदान किया। (10: 98)
और याद करें उस ‘मछलीवाले ’[यूनुस, Jonah] को, जो (अपनी क़ौम से) ग़ुस्सा होकर चले गए थे, यह सोचकर कि हम इस बारे में उनकी पकड़ नहीं करेंगे। मगर फिर उसने (जब मछली के पेट के अंदर) गहरे अँधेरों में (हमें) पुकारा था,
"(अल्लाह!) तेरे सिवा कोई इबादत [पूजने] के लायक़ नहीं, महान है तू! सचमुच मैं ही ग़लती पर था।" (21: 87)
और निस्संदेह यूनुस [Jonah] भी रसूलो में से एक था। (37: 139)
जब वह भागकर पहले से भरी हुई नौका में पहुँचा, (37: 140)
और फिर (भँवर में फंसी नौका को बचाने के लिए एक आदमी को उतार देना था), वह अपने नाम की पर्ची डालने में शामिल हुआ और उसमें उसकी हार हुई (कि पर्ची में उसका ही नाम निकला) (37: 141)
(सो उसे नौका से फेंक दिया गया) और फिर उसे एक बड़ी मछली ने निगल लिया, जबकि उसके द्वारा कुछ दोषपूर्ण काम हो गए थे। (37: 142)
अगर वह उन लोगों में से न होता जो अल्लाह की बड़ाई बयान करते रहते हैं, (37: 143)
तो वह उसी (मछली) के पेट में उस (क़यामत के) दिन तक पड़ा रहता, जब सारे लोग (क़ब्रों से) उठाए जाएँगे। (37: 144)
मगर हमने उसे एक खुले व उजाड़ तट पर (मछली के पेट से) बाहर निकाल दिया, जबकि वह (अभी) बीमार था। (37: 145)
और हमने उस पर (कद्दू का) बेलदार पेड़ उगा दिया था, (37: 146)
फिर हमने उसे एक लाख बल्कि उससे अधिक (लोगों) की ओर [नैनवा, Nineveh नामी शहर में] रसूल बनाकर भेजा, (37: 147)
उन लोगों ने (सच्चाई पर) विश्वास किया, तो हमने उन्हें एक ज़माने तक ज़िंदगी के सुख भोगने का मौक़ा दे दिया। (37: 148)
इसलिए आप अपने रब के आदेश के इंतजार में सब्र किये जाएं: "मछलीवाले" [पैग़म्बर यूनुस/Jonah] की तरह मत हो जाएं, जब उन्होंने (अपनी क़ौम से तंग होकर और) दुख से घुट-घुटकर हमें [अल्लाह को] पुकारा था: (68: 48)
अगर उनके रब की अनुकंपा ने उनको [यूनुस को] संभाल न लिया होता, तो वह ज़रूर दोषी के रूप में उस उजाड़ साहिल पर फेंक दिए जाते (लेकिन अल्लाह ने उन्हें इससे बचाए रखा), (68: 49)
मगर उनके रब ने उनको चुन लिया और उन्हें (अपनी ख़ास नज़दीकी प्रदान करके) नेक बंदों में (शामिल) कर लिया। (68: 50)
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