Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: क़ुरआन के क़िस्से: ज़ुल-क़रनैन:

 क़ुरआन के क़िस्से:


ज़ुल-क़रनैन:


( रसूल) वे आपसे ज़ुलक़रनैन [दो सींगोंवाले] के बारे में पूछते हैं। कह दें, "मैं उसके बारे में तुम्हें कुछ बताता हूँ।" (18: 83)

हमने धरती पर उसकी सत्ता स्थापित की थीऔर उसे हर चीज़ हासिल करने के लिए संसाधन दिए थे। (18: 84)

उसने एक बार (पश्चिम के) रास्ते पर अपना अभियान शुरू किया; (18: 85)

फिर जब वह सूरज डूबने की जगह के पास पहुँचातो उसे ऐसा लगा मानो सूरज दलदल जैसे काले पानी की एक झील में डूब रहा हो। नज़दीक ही उसे कुछ लोग दिखाई दिए, और हमने कहा, " ज़ुलक़रनैन! तुझे अधिकार है कि चाहे तो उन्हें दंड दे या उनके साथ अच्छा व्यवहार कर।" (18: 86)

 उसने जवाब दिया, "जिन लोगों ने शैतानियां की हैं, हम उन्हें दंड देंगे, और फिर जब वह अपने रब के पास लौटकर जाएंगे तो वह उन्हें और भी कठोर यातना देगा, (18: 87)

जबकि जिन लोगों ने (सच्चाई पर) विश्वास किया और अच्छे कर्म किए, तो उनके लिए तो बेहतरीन बदला होगा:  हम उन्हें ऐसे ही काम का आदेश करेंगे जो उनके लिए आसान होगा।" (18: 88)

वह उसके बाद एक और यात्रा पर (पूरब की तरफ़) निकला; (18: 89)

फिर जब वह सूरज निकलने की जगह पर पहुँचा, तो उसने सूरज को ऐसे लोगों पर निकलते हुए पाया जिनके लिए हमने सूरज की गर्मी से बचने के लिए कोई छाया नहीं रखी थी। (18: 90)

 और वहाँ की हालत ऐसी ही थी: हमें उसकी पूरी जानकारी थी। (18: 91)

 

बाद में, वह एक और सफ़र पर निकल पड़ा; (18: 92)

 जब वह दो पर्वतों के बीच (mountain barrier) पहुँचा, तो उसे उनके बीच ऐसी क़ौम के लोग मिले, जो लगता था कि कोई बात नहीं समझते। (18: 93)

उन्होंने कहा, " ज़ुलक़रनैन! याजूज और माजूज  (Gog and Magog) इस भूभाग में उत्पात मचाते रहते हैं। क्या तुम उनके और हमारे बीच एक रोक बना दोगे, अगर हम तुम्हें इस काम के लिए उचित मुआवज़ा दें?” (18: 94)

उसने जवाब दिया, "मेरे रब ने मुझे जो कुछ अधिकार एवं शक्ति दी है वह किसी मुआवज़े से कहीं बेहतर है, लेकिन अगर तुम लोग मेरे काम में हाथ बटाओतो मैं तुम्हारे और उनके बीच एक मज़बूत दीवार खड़ी कर सकता हूँ: (18: 95)

 मुझे लोहे के टुकड़े लाकर दो!", और फिर, जब वह दोनों पहाड़ों के बीच की ख़ाली जगह को पाटकर बराबर कर चुका, तो (उसने कहा), "अब आग दहकाओ!", फिर जब वह (दीवार) आग की तरह लाल हो गयी, तब उसने कहा, "मुझे पिघला हुआ ताँबा लाकर दो, ताकि मैं उसपर उँडेल दूँ!" (18: 96)

 अब तो उनके दुशमन (याजूज-माजूज) उस दीवार पर चढ़कर सकते थे, और वे उसमें सेंध ही लगा सकते थे, (18: 97)

 और उसने कहा, "यह मेरे रब की तरफ़ से रहमत [Mercy] है (कि ऐसी दीवार बन गयी) मगर जब मेरे रब के वादे का समय पूरा हो जाएगा, तो वह इस दीवार को गिराकर बराबर कर देगा: मेरे रब की कही हुई बात सच है, टलने वाली नहीं!" (18: 98)

 

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