Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: क़ुरआन के क़िस्से: तालूत, जालूत और सैम्युएल [Saul, Goliath & Samuel]:
क़ुरआन के क़िस्से:
तालूत, जालूत और सैम्युएल [Saul, Goliath & Samuel]:
[ऐ रसूल], आप उस घटना पर विचार करें जो मूसा के बाद इसराईल की सन्तान के सरदारों के साथ घटी, जब उन्होंने अपने एक नबी [सैम्युऐल] से कहा, "हमारे लिए एक राजा नियुक्त कर दें और हम (उसके झंडे तले) अल्लाह के रास्ते में युद्ध करेंगे।" नबी ने कहा, "लेकिन अगर तुम्हें लड़ाई का आदेश दिया जाए, तो क्या ऐसा नहीं हो सकता है कि तुम लड़ने से मना कर दो?" वे कहने लगे, "हम अल्लाह के रास्ते में आख़िर क्यों न लड़ेंगे, जबकि हम और हमारे बाल-बच्चे अपने घरों से निकाल बाहर किए गए हैं?" इसके बावजूद जब उन्हें जंग करने का हुक्म दे दिया गया, तो उनमें से थोड़े लोगों के सिवा सब पीठ फेरकर चल दिए: अल्लाह हुक्म न मानने वालों की पूरी जानकारी रखता है। (2: 246)
उनके नबी ने उनसे कहा, "अल्लाह ने तुम्हारे लिए तालूत [Saul] को राजा नियुक्त किया है," मगर वे बोले, "उसकी बादशाही हम पर कैसे हो सकती है, जबकि उसके मुक़ाबले में हम राजा बनने के ज़्यादा हक़दार हैं, उसके पास तो ज़्यादा धन-दौलत भी नहीं है?" नबी ने कहा, "अल्लाह ने उसी को तुम्हारे ऊपर चुना है, और उसे ज़बरदस्त ज्ञान भी दिया है और शारीरिक ताक़त भी। अल्लाह जिसे चाहता है, ज़मीन की बादशाही प्रदान कर देता है: अल्लाह (की क़ुदरत) ने हर चीज़ को अपने घेरे में ले रखा है, वह सब कुछ जाननेवाला है।" (2: 247)
उनके नबी ने उनसे कहा, "उसकी बादशाही की निशानी यह है कि (बरसों पहले खोया हुआ) एक ताबूत [Ark of the Covenant] तुम्हारे पास आ जाएगा। उसके अंदर तुम्हारे रब की तरफ़ से (तोहफ़े में) लड़ाई की घबराहट दूर करनेवाला ‘सुकून’ [Tranquility] और मूसा [Moses] व हारून [Aaron] के मानने वालों की छोड़ी हुई यादगारें होंगी, जिसको फ़रिश्ते उठाए हुए होंगे। अगर तुम पक्के ईमानवाले हो, तो इसमें तुम्हारे लिए बड़ी निशानी है।" (2: 248)
फिर तब तालूत [Saul] अपनी सेना लेकर चला, तो उसने (अपनी सेना से) कहा, "अल्लाह एक नदी द्वारा तुम्हारी परीक्षा लेने वाला है। जो कोई इस नदी का पानी पियेगा, वह मेरा आदमी नहीं होगा, मगर जो कोई अपने आपको इसे चखने से रोक लेगा, वही मेरा आदमी होगा; हाँ अगर कोई अपने हाथ से एक चुल्लू भर ले ले (तो उसे माफ़ किया जाएगा)।" मगर ऐसा हुआ कि कुछ लोगों को छोड़कर, सभी ने (जमकर) उसका पानी पी लिया। फिर जब तालूत और ईमानवाले जो उसके साथ थे, नदी पार कर गए, तो वे कहने लगे, "आज हममें जालूत [Goliath] और उसके योद्धाओं का मुक़ाबला करने की ताक़त नहीं है।" मगर, जो लोग जानते थे कि (एक दिन) उन्हें अल्लाह से मिलना है, कहने लगे, "कितनी ही बार ऐसा हुआ है कि एक छोटी-सी टुकड़ी ने अल्लाह की अनुमति से, एक बड़ी सेना को हरा दिया है! अल्लाह तो उनके साथ होता है जो धीरज से अपना पाँव जमाए रहते हैं।" (2: 249)
और जब उनका मुक़ाबला जालूत और उसके योद्धाओं के साथ हुआ, तो वे बोले, "ऐ हमारे रब! हम पर धीरज (धरने की ताक़त) उंडेल दे, हमारे क़दम (लड़ाई में मज़बूती से) जमा दे, और (सच्चाई से) इंकार करनेवाले लोगों के ख़िलाफ़ हमारी मदद कर," (2: 250)
और इस तरह, अल्लाह की अनुमति से उन्होंने जालूत की सेना को हरा दिया। दाऊद [David] ने जालूत [Goliath] को मार डाला, और अल्लाह ने उसे बादशाही और समझ-बूझ [हिकमत] प्रदान की, और जो कुछ सिखाना था, दाऊद को सिखा दिया। अगर अल्लाह एक गिरोह को दूसरे गिरोह के द्वारा हटाता न रहता, तो धरती पर पूरी तरह से बिगाड़ पैदा हो जाता, मगर, अल्लाह सब के लिए बड़ा फ़ज़ल करने वाला है। (2: 251)
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