Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: क़ुरआन की शिक्षाप्रद मिसालें [Parables]: विश्वास न करने वालों [Disbelievers] के कर्म:
क़ुरआन की शिक्षाप्रद मिसालें [Parables]:
विश्वास न करने वालों [Disbelievers] के कर्म:
जो कुछ वे इस सांसारिक जीवन में ख़र्च करते हैं, वह सब बेकार हो जाएगा: उसकी मिसाल ऐसी है जैसे एक तेज़ बर्फ़ीली हवावाली आँधी आए और वह उन लोगों की खेती को बर्बाद कर जाए। (याद रहे!), अल्लाह ने उन पर ज़ुल्म नहीं किया, बल्कि ख़ुद यही लोग अपनी जानों पर ज़ुल्म करते रहे हैं। (3: 117)
जिन लोगों ने अपने रब को मानने से इंकार [कुफ़्र] किया, उनके कर्मों का हाल उस राख के ढेर जैसा होगा, जिसे किसी तूफ़ानी दिन में हवा का तेज़ झोंका उड़ा ले जाता है: जो कुछ भी उन्होंने (अपने कर्मों से) हासिल किया होगा, उनमें से कुछ भी उनके हाथ न आएगा। यही है (असल में) गुमराही में बहुत दूर जा पड़ना! (14: 18)
मगर जो लोग विश्वास नहीं करते, उनके कर्म ऐसे हैं जैसे रेगिस्तान में मरीचिका (mirage)
हो: प्यासा आदमी यह सोचता है कि वहाँ पानी होगा, मगर जब वहाँ पहुंचता है तो कुछ नहीं पाता, केवल अल्लाह को पाता है, जो उसे (इस बेकार कोशिश का) पूरा-पूरा हिसाब चुका देता है---- और अल्लाह हिसाब लेने में बहुत तेज़ है। (24: 39)
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