Thematic Quran/-क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: क़ुरआन की शिक्षाप्रद मिसालें [Parables] : थोड़ी देर की ज़िंदगी [Fleeting world]:
क़ुरआन की शिक्षाप्रद मिसालें [Parables]
थोड़ी देर की ज़िंदगी [Fleeting world]:
इस दुनिया की ज़िंदगी की मिसाल ऐसी है: हमने आसमान से पानी बरसाया, तो उसके कारण धरती से उगने वाली चीज़ें, जिनको आदमी और चौपाये खाते हैं, ख़ूब फली-फूलीं व घनी हो गयीं, मगर जब वह समय आया कि धरती ने (हरियाली के) सारे ज़ेवर पहन लिए, और (लहलहाते हुए खेतों व बाग़ों से) धरती सुंदर दिखायी देने लगी, और उसके मालिक समझने लगे कि अब फ़सल हमारे क़ाबू में आ गयी है, कि अचानक (उसकी बर्बादी का) हुक्म रात या दिन के समय आ पहुँचा। फिर हमने उसे एक उजड़ी-कटी हुई फ़सल में बदलकर रख दिया, मानो एक दिन पहले तक वहाँ कोई भरा-पूरा खेत ही न था। इस तरह, हम उन लोगों के लिए (सच्चाई की) निशानियाँ [आयतें] खोल-खोलकर बताते हैं, जो सोच-विचार से काम लेते हैं। (10: 24)
[ऐ रसूल] उन लोगों को इस दुनिया की ज़िंदगी की मिसाल भी बता दें कि यह ऐसी है जैसे: हमने आसमान से पानी बरसाया, धरती के पेड़-पौधों ने उसे अपने अंदर सोख लिया और हरे-भरे हो गए, फिर कुछ समय बाद ऐसा होता है कि पेड़-पौधे सूखी घांस व भूंसों में बदल जाते हैं जिसे हवाएँ उड़ा ले जाती हैं: अल्लाह को हर चीज़ करने की पूरी पूरी ताक़त है। (18: 45)
(ऐ इंसान) क्या तुमने नहीं देखा कि अल्लाह ने किस तरह आसमान से पानी उतारा, फिर धरती में उसके सोते [springs] बहा दिए; फिर वह उस पानी के द्वारा अलग अलग रंगों की हरियाली व खेतियाँ उगा देता है; फिर वह (तैयार होकर) सूखने लगती हैं; फिर तुम देखते हो कि वह (फ़सल पकने के बाद) पीली पड़ गई; फिर उसके हुक्म से वह दब दबाकर चूर हो जाती हैं? निस्संदेह इन बातों में उन लोगों के लिए बड़ी शिक्षा है जो बुद्धि और समझ रखते हैं। (39: 21)
यह बात दिमाग़ में रहे कि सांसारिक जीवन तो बस एक खेल-तमाशा है, एक भटकाव है, एक आकर्षण है, तुम्हारा आपस में एक-दूसरे पर बड़ाई जताने का एक कारण है, और दौलत और सन्तान में परस्पर एक-दूसरे से बढ़ा हुआ दिखाने की एक होड़ का नाम है। यह तो उन पौधों की तरह हैं जो बारिश के बाद (जगह जगह) उग आते हैं: पौधा लगाने वाला शुरू शुरू में ऐसे पौधों को बढ़ते हुए देखकर बहुत ख़ुश हो जाता है, मगर फिर तुम उन्हें देखते हो कि वे मुरझा जाते हैं, पीले पड़ जाते हैं, फिर वह चारा [Stubble] होकर रह जाते हैं। आगे आनेवाली (आख़िरत की) ज़िन्दगी में दर्दनाक यातना भी है और अल्लाह की तरफ़ से माफ़ी और मंजूरी भी; इस दुनिया की ज़िन्दगी तो केवल धोखे की खुशियाँ (देने वाली) है। (57: 20)
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