Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: क़ानूनी विषय: मियाँ-बीवी का अलग हो जाना:
क़ानूनी विषय:
मियाँ-बीवी का अलग हो जाना:
[जिस तलाक़ में दोबारा मेल-मिलाप की संभावना है, वैसा] तलाक़ दो बार (एक-एक करके) हो सकता है, और (हर एक बार) बीवियों को या तो क़ायदे के अनुसार रोक लिया जाए (और मेल-मिलाप कर लिया जाए) या भले तरीक़े से छोड़ दिया जाए। [तीसरा तलाक़ अंतिम और पक्का हो जाएगा]। तुम्हारे लिए यह वैध नहीं होगा कि जो कुछ तुम (अपनी बीवियों को पहले) दे चुके हो, उसमें से कुछ (तलाक़ देते समय) वापस ले लो, सिवाय इस स्थिति के कि दोनों को यह डर हो कि वे (शादी के लिए) अल्लाह की (निर्धारित) सीमाओं पर क़ायम न रह सकेंगे: अगर तुम [फ़ैसला करनेवाले] को यह शक हो कि वे [मियां-बीवी] ऐसा नहीं कर सकेंगे, तो फिर इस बात में दोनों में से किसी का भी दोष नहीं होगा, अगर औरत (तलाक़ के बदले अपने दहेज़/मेहर में से) कुछ देकर अपना पीछा छुड़ाना चाहे। (याद रहे), ये अल्लाह की सीमाएँ हैं। अतः इनका उल्लंघन न करो। और जो कोई अल्लाह की सीमाओं को तोड़ देगा, तो ऐसे ही लोग अत्याचारी हैं। (2: 229)
जो लोग अपनी बीवियों पर ज़िना [Adultery] करने का इल्ज़ाम लगाएं, मगर उनके पास अपने सिवा कोई दूसरा गवाह मौजूद न हो, तो ऐसे हर आदमी की गवाही इस तरह होगी कि पहले चार बार अल्लाह की क़सम खाकर यह बयान दे कि (इल्ज़ाम के बारे में) वह सच बोल रहा है, (24: 6)
और, पाँचवी बार, यह गवाही दे कि अगर मैं झूठ बोल रहा हूँ, तो मुझ पर अल्लाह की फिटकार हो"; (24: 7)
(मर्द की गवाही के बाद) उसकी बीवी से (ज़िना की) सज़ा टल सकती है, अगर वह भी चार बार अल्लाह की क़सम खाकर गवाही दे कि उसका पति झूठ बोल रहा है (24: 8)
और, पाँचवी बार, यह गवाही दे कि "अगर उसके पति का बयान सच्चा है, तो मुझ पर अल्लाह की फिटकार हो!" (24: 9)
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