Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: क़ुरआन के क़िस्से: बाग़ के मालिकों की कहानी:
क़ुरआन के क़िस्से:
बाग़ के मालिकों की कहानी:
बेशक हमने (इन मक्का के लोगों) को (उसी तरह) आज़माइश में डाला है जिस तरह हमने (यमन के) एक बाग़वालों को उस वक़्त परीक्षा में डाला था जब उन्होंने क़सम खाई थी कि हम सुबह-सवेरे ज़रूर उस (बाग़ के) फल तोड़ लेंगे (68: 17)
और उन्होंने (यह क़सम लेते हुए) किसी और के लिए कोई गुंजाइश नहीं रखी (न अल्लाह की मर्ज़ी की और न ग़रीबों के हिस्से की): (68: 18)
फिर ऐसा हुआ कि जिस वक़्त वे सो रहे थे, उस वक़्त आपके रब की ओर से एक बला [disaster] उस बाग़ पर फेरा लगा गयी। (68: 19)
सो वह (लहलहाता फलों से लदा हुआ बाग़) सुबह कटी हुई फ़सल की तरह उजाड़ हो गया। (68: 20)
फिर सुबह होते ही वे एक दूसरे को पुकारने लगे, (68: 21)
“कि अपने खेत की तरफ सवेरे-सवेरे चले चलो अगर तुम सारे फल तोड़ना चाहते हो”, (68: 22)
सो, वे लोग चल पड़े और वे आपस में चुपके-चुपके कहते जाते थे (68: 23)
कि "ध्यान रखो! आज उस बाग़ में तुम्हारे पास कोई ग़रीब माँगनेवाला आने न पाए!" ----- (24)
और वे सुबह-सवेरे अपनी योजना पर अड़े हुए, तेज़ क़दमों से (बाग़ की तरफ़) चल पड़े ----- (25)
फिर जब उन्होंने उस (वीरान बाग़) को देखा, तो कहने लगे: “हम ज़रूर रास्ता भूल गए हैं!” (यह तो हमारा बाग़ नहीं है), (68: 26)
(थोड़ी देर बाद जब ध्यान से देखा तो पुकार उठे): “नहीं! हम तो लुट गए, बर्बाद हो गए”। (68: 27)
उनमें सबसे अक़्लमंद आदमी ने कहा: “क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था, "क्या तुम (अल्लाह की) याद और उसकी बड़ाई का गुणगान नहीं करोगे?” ---- (68: 28)
(तब) वे कहने लगे कि “हमारा रब पाक व महान है!, सचमुच हम ही शैतानी के काम कर रहे थे!" ------ (68: 29)
फिर उसके बाद वे एक दूसरे के सामने खड़े होकर आपस में एक दूसरे को बुरा-भला कहने लगे। (68: 30)
(फिर सब मिलकर) कहने लगे: “अफ़सोस है हम सब पर! बेशक हम ने बहुत भारी ग़लती की है, (68: 31)
मगर हो सकता है हमारा रब हमें इस (बाग़) के बदले में उससे अच्छा प्रदान कर दे: हम आशा करते हुए, अपने रब के आगे पूरी भक्ति से झुकते हैं”। (68: 32)
(इस जीवन में तो) ऐसा दंड [punishment] है, मगर आने वाली दुनिया [आख़िरत/ परलोक / Hereafter] की यातना (इससे) कहीं बढ़कर है, काश! वे जानते होते, (68: 33)
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