Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: क़ुरआन के क़िस्से: दो बाग़ों का मालिक:
क़ुरआन के क़िस्से:
दो बाग़ों का मालिक:
[ऐ रसूल] आप उनको दो आदमियों की मिसाल बता दें: उनमें से एक को हमने अंगूरों के दो बाग़ दे रखे थे, जो चारों तरफ़ से खजूरों के पेड़ों से घिरे हुए थे और उन दोनों बाग़ों के बीच अनाज के खेत लगे हुए थे; (18: 32)
दोनों बाग़ में ख़ूब फल हुए और पैदावार में किसी तरह की भी कमी न हुई; और उन दोनों के बीच हमने (सिंचाई के लिए) एक नहर भी बहा दी थी, (18: 33)
इस तरह, उसे भरपूर फल हासिल हुए। एक दिन वह अपने दोस्त से बातचीत करते हुए कहने लगा, "मैं तुझसे माल व दौलत में बढ़कर हूँ और मेरे पीछे चलने वाले (लोग) भी कहीं ज़्यादा हैं।" (18: 34)
(फिर बातें करते हुए) वह अपने बाग़ में गया, और यह कहकर अपने आपको नुक़सान में डाल बैठा कि, "मुझे नहीं लगता कि ऐसा हरा-भरा बाग़ कभी बर्बाद भी हो सकता है। (18: 35)
और यह कि मैं नहीं समझता कि वह (क़यामत की) घड़ी कभी आएगी--- और अगर मुझे कभी अपने रब के पास वापस ले भी जाया गया, तो मुझे यक़ीन है कि मुझे वहाँ इससे भी बेहतर चीज़ मिलेगी।" (18: 36)
उसके साथी ने उससे बातचीत करते हुए जवाब में कहा, "क्या तू उस (रब) में विश्वास नहीं रखता, जिसने तुझे (पहली बार) मिट्टी से बनाया, फिर वीर्य [sperm] की बूँद से पैदा किया, उसके बाद तुझे एक पूरा आदमी बना दिया? (18: 37)
मगर मेरे लिए तो, मेरा रब वही (अल्लाह) है, और मैं कभी भी किसी को अपने रब के साथ साझेदार [Partner] नहीं बनाउंगा। (18: 38)
जब तू अपने बाग़ में दाख़िल हो रहा था, काश कि तूने ऐसा कहा होता, “जो भी होता है सब अल्लाह की मर्ज़ी से होता है, और उसकी मदद के बिना किसी में कोई ताक़त नहीं।” हालाँकि तू देखता है कि मैं धन-दौलत और औलाद में तुझसे कम हूँ, (18: 39)
मगर मेरा रब चाहे, तो मुझे कोई ऐसी चीज़ दे सकता है जो तेरे बाग़ से अच्छी हो, और तेरे इस बाग़ पर आसमान से कोई बिजली गिरा सकता है जिससे वह बंजर ज़मीन का ढेर बनकर रह जाए; (18: 40)
या उस बाग़ का पानी धरती की सतह से इतना नीचे चला जाए कि फिर तू किसी तरह भी उस तक न पहुँच सके।" (18: 41)
और ऐसा ही हुआ: उसके फल पूरी तरह से बर्बाद हो गए, उसने बाग़ पर जो कुछ ख़र्च किया था उसपर वह दुखी मन से बस हाथ मलता रह गया, जबकि बाग़ अपनी टट्टियों [Trellis] पर गिरा पड़ा था, वह कहने लगा, "ऐ काश! मैंने अपने रब के साथ किसी को साझेदार [Partner] न बनाया होता!" (18: 42)
अल्लाह को छोड़कर अब उसके पास (गढ़े हुए ख़ुदाओं की) कोई ताक़त ऐसी न थी जो उसकी कोई मदद कर सकती--- वह तो ख़ुद अपनी भी कोई मदद नहीं कर सका। (18: 43)
ऐसी हालत में, शरण लेने की केवल एक ही जगह है और वह है अल्लाह की शरण, वही असली ख़ुदा है (जिसके पास हर चीज़ की ताक़त है): वही सबसे अच्छा बदला [reward] देता है और वही सबसे अच्छा अंजाम दिखाता है। (18: 44)
Comments
Post a Comment