Thematic Quran/ क़ुरआन का विष्यवार अध्ययन: क़ुरआन के क़िस्से: हाबील और क़ाबील [Abel & Cain]:
क़ुरआन के क़िस्से:
हाबील और क़ाबील [Abel & Cain]:
[ऐ रसूल!], आप उन्हें आदम के दो बेटों की कहानी की सच्चाई के बारे में बता दें: दोनों ने (अल्लाह के सामने) अपनी-अपनी क़ुर्बानी पेश की, उनमें से एक [हाबील/ Abel] की क़ुर्बानी क़बूल हो गई और दूसरे [क़ाबील/ Cain] की क़बूल नहीं हुई। इस पर (क़ाबील ने जलते हुए हाबील से) कहा, "मै तुझे अवश्य मार डालूँगा।" मगर हाबील ने कहा, "अल्लाह तो उन्हीं की क़ुर्बानी क़बूल करता है, जो उससे डरते हुए बुराइयों से बचते हैं। (5: 27)
अगर तू मुझे क़त्ल करने के लिए हाथ उठाएगा, तो मैं तुझे मारने के लिए अपना हाथ नहीं उठाउँगा। मैं डरता हूँ अल्लाह से, जो सारे संसार का रब है, (5: 28)
मैं तो चाहता हूँ कि तू मेरे गुनाह और साथ में अपने गुनाहों का बोझ अपने ही सिर ले ले, और (जहन्नम) की आग में बसने वालों में से हो जा: शैतानियाँ करने वालों का बदला ऐसा ही होता है।" (5: 29)
मगर उसकी आत्मा ने उसे अपने भाई की हत्या के लिए उकसाया: उसने अपने भाई (हाबील) की हत्या कर डाली और हारे हुए लोगों में शामिल हो गया। (5: 30)
तब अल्लाह ने एक कौआ भेजा जो ज़मीन कुरेदने लगा, ताकि उसे दिखा दे कि वह अपने भाई की लाश को कैसे छिपाए। यह देखकर (क़ाबील) कहने लगा, "हाय, अफ़सोस मुझ पर! क्या मैं इस कौए जैसा भी न हो सका कि अपने भाई की लाश (ज़मीन खोदकर) छिपा देता?" (अपनी हालत पर) बाद में वह बहुत शर्मिंदा हुआ। (5: 31)
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