Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: क़ुरआन के क़िस्से: सबा Sheba] के लोग:

 क़ुरआन के क़िस्से:


सबा Sheba] के लोग:


सच्चाई यह है कि (यमन में आबाद) सबा [Sheba] के लोगों के लिए ख़ुद उस जगह एक निशानी मौजूद थी जहाँ वे रहा करते थे ---- दो बाग़ थे, एक दाहिनी तरफ़ और दूसरा बायीं तरफ़: "खाओ अपने रब की दी हुई रोज़ी में से और उसका शुक्र अदा करो, कि एक तो ज़मीन इतनी अच्छी-सी और दूसरे रब इतना माफ़ करने वाला।" (34: 15)

मगर उन लोगों ने (मार्गदर्शन पर) कोई ध्यान नहीं दिया, तो (नतीजे में) हमने उन लोगों पर (टूटे हुए) बाँध का सैलाब छोड़ दिया और उनके दोनों बाग़ों के बदले में उन्हें ऐसे बाग़ दिए, जिनमें कड़वे-कसैले फल, झाऊ के पेड़ [Tamarisk bushes], और कुछ थोड़ी सी काँटेदार बेरियों के पेड़ [Lote tree] थे।  (34: 16)

यह दंड हमने उन्हें इसलिए दिया कि उनलोगों ने नाशुक्री [कृतध्नता] की आदत अपना ली थी --- तो क्या ऐसा दंड हमने किसी और को दिया सिवाय उनके जो बड़े नाशुक्रे [ungrateful] लोग थे?  (34:17)

और हमने उनके [यमन के] और उन बरकतवाली बस्तियों [सीरिया फ़िलिस्तीन के इलाक़े] के बीच कुछ दूसरी बस्तियाँ बसा रखी थीं जो दूर से दिखायी देती थीं, और उनकी आसानी के लिए सफ़र को कई पड़ावों में बाँट रखा था --- (और कहा था), "चाहे रात का समय हो या दिन का, इन (बस्तियों) में बिना डरे यात्रा करो"---  (34: 18)

मगर (तब भी), उन्होंने कहा, "हमारे रब ने हमारी यात्राओं के दौरान पड़ाव डालने वाली जगहों के बीच बहुत लम्बी दूरी रख दी है।" (इस तरह) उन्होंने स्वयं अपने आप पर ही ज़ुल्म किया, और अंत में, नतीजा यह हुआ कि हमने उन्हें (अतीत की) कहानियाँ बना डाला, औऱ उन्हें टुकड़े-टुकड़े करके बिल्कुल छिन्न-भिन्न कर डाला। सचमुच, इस घटना में हर एक धीरज रखने वाले और शुक्र अदा करने वाले आदमी के लिए बड़ी निशानियाँ हैं।  (34: 19)

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