Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: आर्थिक विषय: विरासत [Inheritance]:

 आर्थिक विषय:


विरासत [Inheritance]:


मर्दों का उस माल में हिस्सा होगा जो उनके माँ-बाप और नज़दीकी रिश्तेदार छोड़ जाएं, और औरतों का भी उस माल में हिस्सा होगा जो उनके माँ-बाप और रिश्तेदारों ने छोड़ा हो -- चाहे वह थोड़ा हो या अधिक हो: यह हिस्सा अल्लाह का तय किया हुआ है। (4: 7)

 

उस चीज़ की कामना न करो जिसे अल्लाह ने तुममें से किसी को दूसरों से ज़्यादा दिया है ---- मर्दों ने (अपने कर्मों से) जो कुछ कमाया है, उसके अनुसार उनका हिस्सा है; और औरतों ने (अपने कर्मों से) जो कुछ कमाया है, उसके अनुसार उनका हिस्सा है ---- (एक-दूसरे से जलने के बजाए) तुम्हें चाहिए कि अल्लाह से उसका कुछ फ़ज़ल [Bounty] मांगा करो: उसे हर चीज़ की पूरी जानकारी है। (4: 32)

 वो सारी चीज़ जो माँ-बाप और नज़दीकी रिश्तेदार छोड़ जाएँउनके लिए हमने वारिस ठहरा दिए हैं, साथ में वे (औरतें) भी जिनसे तुम (शादी के लिए) अपना हाथ देने का वचन दे चुके हो, तो उन्हें उनका उचित हिस्सा दे दो: अल्लाह हर चीज़ का गवाह है। (4: 33)

 

और जो लोग बाद में ईमान लाए, और हिजरत कर (मदीना) पहुंचे और आपके साथ मिलकर जिहाद किया, तो ऐसे लोग भी आप ही का हिस्सा हैं, मगर अल्लाह की किताब के अनुसार (विरासत/ inheritance में) रिश्तेदारों का (दूसरों से) ज़्यादा हक़ बनता है: अल्लाह को हर चीज़ की पूरी जानकारी है। (8: 75)

 

तुम यह नहीं जानते कि तुम्हारे माँ-बाप और बाल-बच्चों में कौन तुम्हारे लिए ज़्यादा फ़ायदा पहुँचाने वाला है (और किसका हक़ ज़्यादा होना चाहिए, किसका कम): यह (हिस्सा) अल्लाह का ठहराया हुआ क़ानून है, और वह सब कुछ जानता है, हर काम की समझ-बूझ रखता है।  (4: 11)

तुम्हारी बीवियाँ जो कुछ (संपत्ति) छोड़ जाएं, उसमें तुम्हारा [पति का] हिस्सा आधा है, अगर उनसे औलाद (ज़िंदा) न हो;

अगर उनकी औलाद हो, तो तुम एक चौथाई हिस्से के वारिस होगे।

[इन सभी मामले में] इन हिस्सों का बंटवारा, वसीयत पूरी करने और क़र्ज़ चुकता करने के बाद ही होगा।

तुम जो कुछ छोड़कर जाओ, अगर तुम्हारी कोई औलाद नहीं है, तो तुम्हारी बीवियों का हिस्सा चौथाई होगा; और अगर तुम्हारी औलाद है, तो तुम्हारी बीवियाँ आठवें हिस्से की वारिस होंगी।

[इन सभी मामले में] इन हिस्सों का बंटवारा, वसीयत पूरी करने और क़र्ज़ चुकता करने के बाद ही होगा।

 अगर कोई मर्द या औरत मर जाए और उसकी न तो कोई औलाद हो और न ही माँ-बाप बचे हों, मगर (माँ की तरफ़ से) उसका एक भाई या बहन हो, तो वह भाई या बहन छठे हिस्से का वारिस होगा;

अगर भाई-बहन एक से ज़्यादा हुए, तो फिर एक तिहाई हिस्से में वे सब बराबर के भागीदार होंगे,

 [इन सभी मामले में] इन हिस्सों का बंटवारा, वसीयत पूरी करने और क़र्ज़ चुकता करने के बाद ही होगा, शर्त यह है कि  इससे किसी (हक़दार) को कोई नुक़सान न पहुँचे: यह सब कुछ अल्लाह का हुक्म है: और अल्लाह सब कुछ जाननेवाला, बहुत नर्म दिल व मेहरबान है। (4: 12)

 

[ऐ रसूल!] वे आपसे (विरासत के) नियम मालूम करना चाहते हैं, कह दें, "अल्लाह तुम्हें ऐसे आदमी की विरासत के बारे में नियम बताता है, जिसका कोई बाल-बच्चा न हो और उसके बाप-दादा भी ज़िंदा न हों।

अगर ऐसा कोई मर्द मर जाए और उसकी एक बहन हो, तो जो कुछ उसने छोड़ा है उसका आधा हिस्सा उस बहन का होगा;

 अगर वह बहन मर जाए और उसका भी कोई बाल-बच्चा न हो, तो (उसके माल का) अकेला वारिस उसका भाई होगा;

 अगर केवल दो (या दो से ज़्यादा) बहनें ही हों, तो छोड़े गए माल का उनके लिए दो-तिहाई हिस्सा होगा

 लेकिन अगर भाई बहनें दोनों हों, तो एक मर्द का हिस्सा दो औरतों के बराबर होगा।"

अल्लाह तुम्हारे लिए इन नियमों को स्पष्ट करता है, ताकि तुम ग़लतियाँ न कर बैठो: अल्लाह को हर चीज की पूरी जानकारी है।  (4: 176)

 

ये अल्लाह की ठहराई हुई सीमाएँ हैं: जो कोई अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करेगा, उसे वह (जन्नत के) ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी, और वे वहां हमेशा रहेंगे---- यही सबसे बड़ी कामयाबी है। (4: 13)

मगर जो कोई अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा नहीं मानेगा और उसकी ठहराई हुई सीमाओं को लांघेगा, उसे अल्लाह द्वारा (जहन्नम की) आग में झोंक दिया जाएगा, जिसमें उसे रहना होगा---- अपमानित करने वाली यातना उनके इंतज़ार में है। (4: 14)

 

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