Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: अनदेखी चीज़ें: जिन्न:

 अनदेखी चीज़ें:


जिन्न:


और जिन्न को इससे पहले, हम जलती हुई हवा की गर्मी से पैदा कर चुके थे। (15: 27

और जिन्न को बिना धुएं की आग से पैदा किया।  (55: 15)


( रसूल) आप कह दें: मेरी ओर वही”[revelation] भेजी गयी है कि जिन्नों के एक दल ने (मेरे क़ुरआन पढ़ने को) ध्यान से सुनातो (जाकर अपनी क़ौम से) कहने लगे: बेशक हमने एक अजीब क़ुरआन सुना है”,  (72: 1)

जो अच्छाई की राह पर चलने का रास्ता दिखाती हैइसलिए हमने उस पर विश्वास कर लिया है ---- और अब हम (इबादत में) अपने रब के साथ किसी और को कभी साझेदार [partner] नहीं ठहराएँगे----  (72: 2)

और यह कि, “हमारे रब की शान बहुत ऊँची है! उसकी कोई पत्नी है और ही कोई औलाद।”  (72: 3)

हममें से कुछ मूर्ख लोग अल्लाह के बारे में ऐसी बातें कहा करते थे जो सच्चाई से बहुत दूर थीं,  (72: 4)

हालाँकि हमने यह समझा था कि इंसान और जिन्न अल्लाह के बारे में कभी झूठ बोलने की हिम्मत नहीं करेंगे।  (72: 5)

इंसानों में से कुछ लोगों ने पहले भी जिन्नों से शरण माँगी हैमगर इससे जिन्नों ने उन्हें केवल और ज़्यादा भटका ही दिया था।  (72: 6)

वे [इंसान] समझते थेजैसा कि तुमने ( जिन्नों के समूह!) समझाकि अल्लाह (मरने के बाद) कभी किसी को दोबारा नहीं उठाएगा।  (72: 7)

हम (जिन्नों) ने आसमानों को टटोलना चाहा तो उन्हें कड़े पहरेदारों और (अंगारों की तरह) जलने और चमकनेवाले सितारों [shooting stars] से भरा हुआ पाया ---- (72: 8)

हम (आगे होने वाली चीज़ों की सुन-गुन लेने के लिए) पहले उस [आसमान] के कुछ स्थानों पर बैठ जाया करते थेमगर अब जो कोई (चोरी-छुपे) सुनना चाहेतो वह देखता है कि कोई आग की लौ है जो उसके घात में लगी हुई है---- (72: 9)

(सो अब),  हम नहीं जानते कि (हमारे ऊपर रोक लगा देने से) ज़मीन पर रहने वालों के साथ कोई बुरा मामला करने का इरादा किया गया हैया उनके रब ने उनके साथ भलाई का ( सीधा रास्ता दिखाने का) इरादा किया है।”  (72: 10)

हममें से कुछ अच्छे नेक हैं और हम (ही) में से कुछ ऐसे (नेक) नहीं हैं: हम अलग-अलग रास्तों पर चल रहे हैं। (72: 11) 

हम जानते हैं कि हम अल्लाह को ज़मीन में कभी भी आजिज़ [frustrate] नहीं कर सकतेहम उससे बचकर कहीं भाग भी नहीं सकते।  (72: 12)

जब हमने रास्ता दिखानेवाली (किताब) को सुना तो उस पर विश्वास कर लिया: फिर जो कोई अपने रब पर विश्वास कर लेता हैउसे तो किसी नुक़सान से डरने की ज़रूरत हैऔर किसी अन्याय से। (72: 13)

हममें से कुछ तो उसी (अल्लाह) के सामने अपना सिर झुकाते हैंऔर कुछ दूसरे हैं जो ग़लत रास्तों पर चलते हैं: जो (अल्लाह के) सामने अपना सिर झुकाते हैंउन्होंने तो सूझ-बूझ की राह ढूँढ ली,  (72: 14)

मगर जिन्होंने (सच्चाई से मुँह मोड़ते हुए) ग़लत रास्ता अपना लियातो वे जहन्नम का ईंधन बनने वाले हैं।” (72: 15)


और याद करें [ रसूल], जब हमने जिन्नों के एक समूह को आपके पास क़ुरआन को सुनने के लिए भेजा था, तो जब वे वहाँ पहुँचकर उसे सुनने लगे तो उन लोगों ने (एक दूसरे से) कहा, "चुप हो जाओ!" फिर जब उस (क़ुरआन) का पाठ पूरा हुआ तो वे अपनी क़ौम की ओर लौट गए और उन्हें (अल्लाह की ओर से) चेतावनियाँ दीं। (46: 29)

उन (जिन्नों) ने कहा, " मेरी क़ौम के लोगो! हमने एक ऐसी किताब [क़ुरआन] सुनी है, जो मूसा (की तौरात) के बाद उतारी गई है, जो अपने से पहले उतारी गयी किताबों को सच्चा मानती है, और सच्चाई और सीधे मार्ग की तरफ़ मार्गदर्शन करती है।  (46: 30)

 (आगे कहा) लोगो! उसकी बात मान लो जो तुम्हें अल्लाह की तरफ़ बुलाता है। उस (अल्लाह) में विश्वास करो: अल्लाह तुम्हारे गुनाहों को माफ़ कर देगा और तुम्हें दर्दनाक यातना से बचा लेगा।”  (46: 31)

 और जो कोई अल्लाह की तरफ़ बुलाने वाले की बात नहीं मानता, तो वह धरती पर कहीं भी अल्लाह के क़ाबू से बच निकलने वाला नहीं है, और कोई अल्लाह से उसकी रक्षा करने वाला होगा: ऐसे लोग सचमुच रास्ता भटककर दूर जा पड़े हैं। (46: 32)

 

मैंने तो जिन्नों और इंसानों को केवल इसलिए पैदा किया है कि वे मेरी ही बन्दगी [worship] करें:  (51: 56) 

मैं उनसे किसी तरह की रोज़ी (कमाई) तो नहीं चाहता, और यह चाहता हूँ कि वे मुझे (खाना) खिलाएँ ---   (51: 57)

अल्लाह तो ख़ुद ही है रोज़ी देनेवाला, बेहद ताक़तवाला, सबसे मज़बूत! (51: 58) 

 

 

Comments

Popular posts from this blog

Thematic Quran: क़ुरआन के क़िस्से: हज़रत सुलैमान (अ‍लै.)/ Solomen (PBUH)

Thematic Quran: क़ुरआन के क़िस्से : हज़रत शुऐब (अलै.)

Thematic Quran: क़ुरआन के क़िस्से : हज़रत दाउद [David] (अलै.)