आने वाली दुनिया [आख़िरत] में जाने का रास्ता: बड़े गुनाह: अल्लाह की इबादत में दूसरों को साझेदार बनाना [शिर्क]:
आने वाली दुनिया [आख़िरत] में जाने का रास्ता:
बड़े गुनाह:
अल्लाह की इबादत में दूसरों को साझेदार बनाना [शिर्क]:
अल्लाह इस बात को कभी माफ़ नहीं करता कि उसकी (ख़ुदायी के) साथ किसी साझेदार [Partner] को जोड़ा जाए: इसके अलावा जैसा भी निचले दर्जे का गुनाह हो, वह जिसे चाहेगा, माफ़ कर देगा, मगर जिस किसी ने अल्लाह का साझेदार ठहराया, तो उसने एक बड़ा झूठ गढ़ लिया। (4: 48)
अल्लाह को छोड़कर किसी दूसरे की इबादत की जाए, इसको वह कभी माफ़ नहीं करता ---- हालाँकि वह जिसके लिए चाहे, उसके छोटे-मोटे गुनाह माफ़ कर ही देता है---- तो जिस किसी ने ऐसा किया, वह भटककर सीधे रास्ते से बहुत दूर जा पड़ा।
(4: 116)
जो लोग कहते हैं, "अल्लाह तो वही मरयम का बेटा, मसीह है", उन्होंने (सच्चाई से इंकार करते हुए) अल्लाह के आदेश को चुनौती दी है। वैसे ख़ुद मसीह ने कहा था, "ऐ इसराईल की सन्तानों! अल्लाह की बन्दगी करो, जो मेरा और तुम्हारा रब है।" जिस किसी ने अल्लाह के साथ (उसकी ख़ुदायी में) किसी को साझेदार [Partner]
ठहराया, तो अल्लाह ने उसके जन्नत में जाने पर रोक लगा दी, और उसका ठिकाना जहन्नम होगा। कोई न होगा जो ऐसे बुरे काम करने वालों की मदद करेगा।" (5: 72)
आप पूछें, "एक गवाह के लिए सबसे बड़ी बात क्या होती है?", कहें,
"अल्लाह मेरे और तुम्हारे बीच गवाह है। इस क़ुरआन को मेरी तरफ़ उतारा गया है, ताकि मैं इसके द्वारा तुम (लोगों) को और जहाँ तक यह (संदेश) पहुँचे, उनमें से हर एक को (सच्चाई का इंकार करने और बुरे कर्मों के नतीजे से) सावधान कर दूँ। क्या सचमुच तुम इस बात की गवाही देते हो कि अल्लाह के साथ दूसरे देवता भी हैं?" कहें,
"मैं ख़ुद तो (ऐसी किसी चीज़ की) गवाही नहीं देता।" कह दें, "वह तो बस एक अकेला अल्लाह है, और तुम जिस किसी को भी (उसकी ख़ुदायी के साथ) जोड़ते हो, उससे मेरा कोई सम्बन्ध नहीं।"
(6: 19)
लुक़मान ने अपने बेटे को समझाते हुए कहा था, "ऐ मेरे बेटे! किसी को भी अल्लाह का साझेदार [Partner] मत ठहराना। अल्लाह के साथ (उसके अधिकारों में किसी को) साझेदार ठहराना सचमुच बहुत भारी ग़लती है।" (31: 13)
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