आने वाली दुनिया [आख़िरत] में जाने का रास्ता : बड़े गुनाह: ईमान गँवा देना [Apostacy]:

 आने वाली दुनिया [आख़िरत] में जाने का रास्ता


बड़े गुनाह:


ईमान गँवा देना [Apostacy]:


[ऐ रसूल]वे आपसे पूछते हैं कि आदर के (चार) महीनों में युद्ध करना कैसा हैआप कह देंउन (महीनों) में लड़ना बड़ा भारी गुनाह हैमगर (याद रखो!)दूसरों को अल्लाह के मार्ग से रोकनाउस पर विश्वास करने से इंकार करना, "पवित्र मस्जिद" [काबा] में जाने से रोकनाऔर (मक्का से) वहाँ बसे हुए लोगों को निकाल बाहर करनाअल्लाह की नज़र में इससे भी कहीं बड़ा गुनाह है: लोगों पर अत्याचार करना (इस कारण से कि वे अल्लाह पर विश्वास रखते हैं)हत्या करने से भी बुरा है।" [ईमानवालो]वे तुम से लड़ना बंद नहीं करेंगेऔर अगर उनका बस चलेतो तब तक लड़ेंगे जब तक तुम्हें तुम्हारे दीन [धर्म] से फेर न दें। और अगर तुममें से कोई अपने दीन को छोड़ देऔर इंकार करनेवाले के रूप में मरेतो उसके सारे कर्मदुनिया और आख़िरत दोनों में बेकार हो जाएंगेऔर उसका ठिकाना (जहन्नम की) आग होगाजहाँ उसे हमेशा रहना है।  (2: 217]


ऐ ईमान रखनेवालो! तुममें से जो कोई अगर अपने पिछले धर्म की ओर लौटता है (और उन्हें अपना मददगार बनाता है), तो अल्लाह जल्द ही तुम्हारे बदले में ऐसे लोगों को ले आएगा जिन्हें वह पसंद करता है और वे उसे पसंद करते हों, वे ईमानवालों के साथ नर्मी से पेश आएंगे और विश्वास न करनेवालों के साथ कठोरता अपनाएंगे, और वे बिना बुरा-भला कहने वालों की परवाह किए, अल्लाह की राह में जी-तोड़ संघर्ष करेंगे। यह है अल्लाह का फ़ज़ल [bounty], वह जिसे चाहता है प्रदान करता है। अल्लाह के पास कभी न ख़त्म होने वाला फ़ज़ल भी है और ज्ञान भी।  (5: 54

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