आने वाली दुनिया [आख़िरत] में जाने का रास्ता: बड़े गुनाह: खाने की हराम [forbidden] चीज़ें
आने वाली दुनिया [आख़िरत] में जाने का रास्ता:
बड़े गुनाह:
खाने की हराम [forbidden] चीज़ें:
[मुसलमानो!], तुम्हारे लिए (खाने की) ये चीज़ें हराम [Forbidden] कर दी गयी हैं: मरे हुए जानवर का (सड़ा-गला) मांस; ख़ून; सूअर का मांस, कोई भी जानवर जिस पर (काटते समय) अल्लाह को छोड़कर किसी और का नाम लिया गया हो; कोई भी जानवर जिसका गला घोंटकर मारा गया हो, या ज़ोरदार चोट खाकर मर गया हो, या ऊँचाई से गिरकर या सींग लगने से मरा हो या जिसे किसी हिंसक पशु ने फाड़
खाया हो--- मगर हाँ, वह (हराम नहीं) जिसे (मरने से पहले) तुमने (सही तरीक़े
से) ज़बह कर लिया हो; और (किसी जानवर
का मांस) जो मूर्तिपूजकों के बलि देने की जगह पर काटा गया हो, हराम [Forbidden] है। तुम्हारे लिए
यह भी हराम किया जाता है कि लोगों के बीच (मांस के) हिस्सों का बंटवारा निशान लगी
हुई जुए की तीरों से किया जाए----- यह बड़े गुनाह की रीति है ----- आज (सच्चाई से)
इंकार करनेवाले इस बात की सारी उम्मीद छोड़ चुके हैं कि तुम अपना धर्म छोड़ दोगे।
अत: उनसे न डरो: मुझसे डरो। आज के दिन मैंने तुम्हारे दीन को तुम्हारे लिए (हर तरह
से) पूरा कर दिया, तुम पर अपनी नेमत पूरी कर दी और मैंने तुम्हारे दीन
के रूप में "इस्लाम" [एक अल्लाह पर पूरी भक्ति] को पसन्द कर लिया: लेकिन
अगर तुममें से कोई भूख से ऐसा मजबूर हो जाए कि उसे हराम चीज़ें खानी पड़ जाएं, तो अगर उसका इरादा गुनाह करने का नहीं था, तो (कोई बात नहीं) अल्लाह बड़ा माफ़ करनेवाला, बेहद दयावान है। (5: 3)
[ऐ रसूल!] उनसे कह दें, "जो कुछ मुझ पर 'वही' [Revelation] द्वारा भेजा गया है, उसमें तो मैंने कोई चीज़ ऐसी नहीं पायी जो लोगों के
खाने के लिए मना [हराम] हो, सिवाय इसके कि वह मरे हुए जानवर का सड़ा-गला मांस हो, या बहता हुआ ख़ून हो या सुअर का मांस हो
----कि ये गंदी (नापाक) चीज़ें हैं---- या वह (बलि चढ़ा हुआ) गुनाह का जानवर हो, जिसपर अल्लाह के बदले किसी और का नाम लिया गया हो।" "लेकिन
अगर कोई भूख के मारे (इन चीज़ों को खाने पर) मजबूर हो जाए, और वह ऐसा जान-बूझकर न करे और न ही भूख मिटाने से ज़्यादा खाए, तो फिर
अल्लाह बहुत माफ़ करनेवाला, बेहद दयावान है।" (6: 145)
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