Thematic Quranक़ुरआन का विषयवार अध्ययन: सामाजिक विषय: इंसानों के बीच समानता का अधिकार:
सामाजिक विषय:
इंसानों के बीच समानता का अधिकार:
लोगो! हमनें तुम सबको अकेले मर्द और अकेली औरत से पैदा किया, और तुम्हें नस्लों [क़ौमों] और क़बीलों में बाँट दिया, ताकि तुम एक-दूसरे को पहचान सको। अल्लाह की नज़र में तुममें सबसे ज़्यादा इज़्ज़तवाला वह है, जो सबसे ज़्यादा अल्लाह से (डरते हुए) बुराइयों से बचने वाला है। अल्लाह सब कुछ जाननेवाला, हर चीज़ की ख़बर रखनेवाला है। (49: 13)
उनके रब ने उनकी पुकार सुनकर जवाब दिया: "मैं तुममें से किसी के भी कर्मों को बेकार जाने नहीं दूँगा, चाहे मर्द हो या औरत, (कर्मों का बदला पाने में) तुम सब एक दूसरे के बराबर हो। मैं उन लोगों के बुरे कर्मों को ज़रूर मिटा दूँगा, जो लोग घर-बार छोड़कर (मदीना) चले गए, अपने घरों से निकाले गए, जिसने मेरे रास्ते में नुक़सान उठाया, जो (दुश्मनों से) लड़े और मारे गए। मैं उन्हें अवश्य ही ऐसे बाग़ों में दाख़िल करूँगा, जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी, यह उनके कर्मों का बदला होगा: सबसे अच्छा बदला अल्लाह के ही पास है।" (3: 195)
जो कोई भी अच्छे कर्म करेगा, चाहे मर्द हो या औरत, और वह ईमान रखता हो, तो वह जन्नत में दाख़िल होगा, और उसके साथ रत्ती भर भी ज़ुल्म नहीं होगा। (4: 124)
चोर चाहे मर्द हो या औरत, उसके हाथ काट डालो, जो कुछ उन्होंने किया है यह उसकी सज़ा है और अल्लाह की ओर से इस (बुराई) को रोकने का एक तरीक़ा: अल्लाह सब पर प्रभुत्व रखनेवाला, (और आदेश देने में) समझ-बूझ रखनेवाला है। (5: 38)
जो कोई मर्द हो या औरत, अगर अच्छे कर्म करता है, और ईमान भी रखता है, तो हम उसे (दुनिया में) अवश्य अच्छी ज़िंदगी देंगे और उनके बेहतरीन कर्मों के मुताबिक़ (आख़िरत में भी) उन्हें इनाम देंगे। (16: 97)
अगर औरत और मर्द बिना शादी किए, एक दूसरे के साथ सेक्स [ज़िना/ extra-marital
sexual intercourse] करते हैं, तो ऐसे में दोनों को (सज़ा के तौर पर) सौ-सौ कोड़े मारो। अगर तुम अल्लाह और आने वाले अंतिम दिन [क़यामत] पर विश्वास रखते हो, तो (देखो) कहीं ऐसा न हो कि अल्लाह के क़ानून पर अमल करते समय उनपर तरस खाकर तुम्हारा हाथ रुक जाए------ और (यह भी ध्यान रहे कि) उन्हें दंड देते समय ईमानवालों का एक समूह वहाँ देखने के लिए मौजूद होना चाहिए। (24: 2)
जिस किसी ने बुराई की होगी तो उसे उसी के बराबर बदला मिलेगा; किन्तु जिस किसी ने अच्छा कर्म किया और वह (एक अल्लाह में) विश्वास रखता हो, तो वह मर्द हो या औरत, वह जन्नत में प्रवेश करेगा और वहाँ उसे बेहिसाब रोज़ी दी जाएगी। (40: 40)
जिन औरतों को तलाक़ दी गयी है, उन्हें चाहिए कि तीन बार मासिक-धर्म [Periods] आने की अवधि तक अपने आपको (दूसरी शादी से) रोके रखें, और, अगर वे सचमुच अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान रखती हैं, तो उनके लिए यह वैध न होगा कि जो चीज़ अल्लाह ने उनके पेट में पैदा कर दी हो, उसे छिपाएँ: इस अवधि के दौरान, उनके पतियों के लिए बेहतर यह होगा कि वे उन्हें (अपनी बीवी के रूप में) वापस ले लें, शर्त यह है कि वे (आपस के) मामलों को ठीक करने की इच्छा रखते हों। और (देखो), सर्वमान्य तरीक़े के अनुसार, बीवियों के (अपने पतियों पर) जैसे अधिकार हैं, उसी तरह की उनकी ज़िम्मेदारियाँ भी हैं, और पतियों को उन पर एक ख़ास दर्जा (अधिकार) दिया गया है: (दोनों को याद रखना चाहिए कि) अल्लाह बहुत ताक़त रखनेवाला, बड़ी समझ-बूझ रखनेवाला है। (2:
228)
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