Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: सामाजिक विषय: घर के अंदर आने की इजाज़त [अनुमति] लेना:
सामाजिक विषय:
घर के अंदर आने की इजाज़त [अनुमति] लेना:
ऐ
ईमानवालो,
तुम्हारे ग़ुलामों और तुममें से
वह बच्चे जो अभी युवावस्था को नहीं पहुँचे हैं, उनको
चाहिए कि दिन के तीन समयों में तुम्हारे पास आएं तो अनुमति लेकर आया करें: सुबह की
नमाज़ से पहले;
दोपहर की गर्मी के वक़्त जब तुम (आराम के लिए) अपने कपड़े
उतारकर रखते हो;
और रात की नमाज़ के बाद। ये तीन समय तुम्हारे लिए (पर्दे
में) अकेले रहने के हैं; इसके अलावा दूसरे वक़्तों में तुम पर या उनपर कोई गुनाह
नहीं है अगर तुम एक दूसरे के यहाँ बिना किसी रोक-टोक के आते जाते हो। तो (देखो), अल्लाह
इस तरीक़े से अपने संदेशों को स्पष्ट करता है: अल्लाह सब कुछ जाननेवाला, (और
अपने काम में) बहुत समझ-बूझ रखनेवाला है। (24: 58)
जब
तुम्हारे बच्चे युवावस्था को पहुँच जाएँ, तो
उन्हें भी चाहिए कि अंदर आने से पहले (हमेशा) अनुमति लिया करें, जैसा
कि उनसे बड़े लेते हैं। इस प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी आयतों को स्पष्ट करता
है। अल्लाह सब कुछ जाननेवाला, (और
अपने काम में) बहुत समझ-बूझ रखनेवाला है। (24: 59)
बड़ी
बूढ़ी औरतें जिन्हें अब निकाह करने की उम्मीद बाक़ी नहीं रही, अगर
वे बिना अपना बनाव-श्रृंगार दिखाए हुए अपने ओढ़ने के कपड़े (चादरें) उतारकर रख दें, तो
उनके लिए इसमें गुनाह की कोई बात नहीं, फिर
भी अगर वे (चादर उतारने से) बचें, तो
उनके लिए ज़्यादा अच्छा होगा: अल्लाह सब कुछ सुननेवाला, सब
कुछ देखनेवाला है। (24: 60)
ऐ ईमानवालो! दूसरे लोगों के घऱों में तब तक न घुसा करो, जब तक कि अंदर जाने की इजाज़त न मांग लो और उन घरवालों को सलाम न कर लो---- यही तुम्हारे लिए सबसे अच्छा तरीक़ा होगा: शायद कि तुम इस बात का ध्यान रखो। (24:
27)
अगर ऐसा लगे कि घर के अंदर कोई नहीं, तब भी अंदर तब तक न जाओ, जब तक कि अनुमति न ले लो। अगर तुमसे कहा जाए, “वापस चले जाओ”, तो लौट जाओ----- यही तुम्हारे लिए उचित होगा। (याद रखो) अल्लाह अच्छी तरह जानता है जो कुछ तुम
करते हो। (24: 28)
ऐसे घरों के अंदर जाने में कोई दोष नहीं है, जहाँ कोई न रहता हो, और जिनमें
तुम्हारे फ़ायदे की कोई चीज़ मिल सके। (याद रखो!) हर वह चीज़ जो तुम सबके सामने करते
हो और हर वह चीज़ जो तुम छिपाते हो, सब कुछ अल्लाह जानता है। (24: 29)
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