Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: सामाजिक विषय: प्रतिज्ञा [Vows] करना
सामाजिक विषय:
प्रतिज्ञा [Vows] करना:
और (देखो!) दान के लिए तुम जो कुछ भी दो, या मन्नत के रूप में जो ख़र्च करो, अल्लाह उसे अच्छी तरह जानता है, और जो लोग (दिखावे का) ग़लत काम करते हैं, उन्हें मदद करने वाला कोई न होगा। (2: 270)
उनमें से कुछ लोगों ने अल्लाह के सामने यह कहते हुए वचन दिया था कि, "अगर अल्लाह अपने फ़ज़ल से कुछ हमें देगा, तो हम ज़रूर दान करेंगे, और नेक व अच्छे बनकर रहेंगे", (9: 75)
मगर जब अल्लाह ने उन्हें अपने फ़ज़ल से सचमुच दे दिया, तो वे उसमें कंजूसी करने लगे और अपने वचन से फिर गए। (9: 76)
क्योंकि उन लोगों ने अल्लाह से किए गए वादे को तोड़ डाला, वह सारे झूठ जो वे बोलते रहे, इन सबके नतीजे में अल्लाह ने उनके दिलों में 'पाखंड' [Hypocrisy] को उस दिन तक के लिए बैठा दिया, जिस दिन कि वे अल्लाह से मिलेंगे। (9: 77)
फिर (हज में आए हुए) लोगों को चाहिए कि साफ़-सुथरे हो जाएं, अपनी मन्नतें पूरी करें और इस पुराने घर [काबा] का (सात
बार) चक्कर [तवाफ़] लगाएं।" (22: 29)
(ये अल्लाह के वे ख़ास
बंदे हैं) जो (अपनी) नज़रें [मन्नतें] (मान लेते हैं तो उसे) पूरी करते हैं, और उस दिन से डरते हैं जिसकी सख़्ती बड़ी व्यापक होगी। (76: 7)
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