Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: सामाजिक विषय: अपने माँ-बाप की इज़्ज़त करना:

 

सामाजिक विषय:


अपने माँ-बाप की इज़्ज़त करना:


अल्लाह की बन्दगी करो; उसके साथ किसी और को साझेदार [Partner] बनाओ। अच्छा व्यवहार करो अपने माँ-बाप के साथ, रिश्तेदारों, अनाथों और ज़रूरतमंदों के साथ, नज़दीक और दूर में रहने वाले पड़ोसियों के साथ, पास के बैठेने-उठनेवालों के साथ, ज़रूरतमंद मुसाफ़िरों के साथ, और अपने ग़ुलामों के साथ। अल्लाह घमंड करनेवालों को और डींगें मारने वालों को पसन्द नहीं करता, (4: 36)

 

आपके रब ने आदेश दिया है कि तुम उसके सिवा किसी की बन्दगी करो, और यह कि माँ-बाप के साथ अच्छा व्यवहार करो। अगर उनमें से कोई एक या दोनों ही तुम्हारे सामने बुढ़ापे को पहुँच जाएँ, तो (अपना धीरज खोते हुए) उन्हें 'उफ़'! तक कहो और उनके साथ कठोरता से पेश आओ, बल्कि उनसे आदर के साथ बात किया करो, (17: 23)

और नर्मी के साथ बर्ताव करते हुए उनके सामने विनम्रता से अपने आपको झुकाओ और कहो, "मेरे रब! जिस तरह उन्होंने बचपन में मुझे पाला-पोसा और बड़ा किया था, तू भी उन पर दया कर।" (17: 24)

जो कुछ तुम्हारे दिल में है, उसे तुम्हारा रब अच्छी तरह से जानता है। अगर तुम अच्छे नेक हुए, तो वह उन लोगों को (जिनसे अनजाने में छोटे-मोटे गुनाह हो जाते हैं) बहुत माफ़ करनेवाला है जो उसके सामने (गुनाहों से तौबा करते हुए) झुकते हैं। (17: 25)

 

हमने लोगों को अपने माँ-बाप के साथ अच्छा सलूक करने पर बहुत ज़ोर दिया है: तकलीफ़-पे-तकलीफ़ सह के, उनकी माँ उन्हें अपने पेट में लिए फिरी, और दो वर्ष लगते हैं (बच्चों को) दूध छुड़ाने में। सो तुम मेरा शुक्र अदा करो और साथ में अपने माँ-बाप का भी---- (अंत में) सबको मेरी ही पास लौटकर आना है। (31: 14)

 अगर तब भी, वे [माँ-बाप] तुझ पर दबाव डालें कि तू मेरे साथ किसी और को (मेरी ख़ुदायी में) साझेदार [partner] ठहराए, जिसका तुझे (कोई किताबी) ज्ञान नहीं, तो उनकी बात मत मानना। मगर इसके बावजूद, अपनी ज़िंदगी में तुम उनके साथ भले तरीक़े से रहना, और उन लोगों के रास्ते पर चलना जो (पूरी भक्ति से माफ़ी के लिए) मेरी ओर झुकते हैं। और अंत में, तुम सबको मेरे ही पास लौटकर आना है, और फिर मैं तुम्हें वह सब कुछ बता दूँगा जो तुम ने किया होगा। (31: 15)

 

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