Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन : सामाजिक विषय: ख़्वाबों [Dreams] का मतलब बताना:
सामाजिक विषय:
ख़्वाबों [Dreams] का मतलब बताना:
फिर जब वह लड़का इतना बड़ा हो गया कि बाप के काम में हाथ बँटाने लगा (और उनके साथ दौड़-धूप करने लगा), तब इबराहीम ने उससे कहा, "ऐ मेरे बेटे! मैंने सपने में देखा है कि मैं तुझे क़ुरबान कर रहा हूँ। तो अब बताओ, कि तुम्हारा क्या विचार है?" उसने कहा, "ऐ मेरे बाबा! आप वही करें जिसका आपको आदेश दिया जा रहा है, और अल्लाह ने चाहा, तो आप मुझे धैर्य [सब्र] करने वालों में से पाएँगे।" (37: 102)
(और देखो!) जब ऐसा हुआ कि यूसुफ़ [Joseph] ने अपने बाप [याक़ूब/Jacob] से कहा, "बाबा! मैंने ख़्वाब में ग्यारह सितारे, सूरज और चाँद को देखा: मैंने उन सबको देखा कि वे मेरे आगे झुके हुए हैं।" (12: 4)
यूसुफ़ के साथ-साथ क़ैदख़ाने में दो जवान लड़कों ने भी प्रवेश किया। उनमें से एक ने (यूसुफ़ से) कहा, "मैंने यह सपना देखा है कि मैं (शराब बनाने के लिए) अंगूरों को निचोड़ रहा हूँ"; दूसरे ने कहा, "मैंने देखा कि मैं अपने सिर पर रोटियाँ उठाए हुए हूँ, जिनको चिड़ियाँ खा रही हैं।" [वे बोले], “हमें इस सपने का मतलब बता दीजिए----हमें तो आप बहुत ही नेक व क़ाबिल आदमी नज़र आते हैं।" (12: 36)
(फिर एक दिन ऐसा हुआ कि मिस्र का) बादशाह कहने लगा, "मैंने ख़्वाब में देखा कि सात मोटी गायों को सात दुबली गायें खा रही हैं; और अनाज की सात बालें हरी हैं और दूसरी (सात) सूखी। ऐ दरबारियो! अगर तुम ख़्वाबों के मतलब बता सकते हो, तो मुझे मेरे ख़्वाब का मतलब बताओ।" (12: 43)
[ऐ रसूल], याद करें जब अल्लाह ने आपको ख़्वाब में उन (दुश्मनों) की संख्या कम करके दिखायी: अगर अल्लाह ने तुम [ईमानवालों] को उनकी संख्या ज़्यादा दिखायी होती, तो तुम ज़रूर ही हिम्मत हार बैठते और इस मामले में झगड़ने लग जाते, मगर अल्लाह ने तुम्हें (उस हालत से) बचा लिया। (याद रहे!) वह दिलों के अंदर छिपे हुए राज़ को भी जानता है। (8: 43)
सचमुच अल्लाह ने अपने रसूल के ख़्वाब को पूरा कर दिखाया है: "अल्लाह ने चाहा, तो आप ज़रूर ही उस पवित्र मस्जिद [काबा] में सुरक्षित दाख़िल होंगे, (हज की रीति के अनुसार) अपने सिर के बाल मुंडवाए हुए या बाल छंटवाए हुए, बिना किसी डर-भय के!" ----- अल्लाह वह बातें जानता था जो आप नहीं जानते-----और उसने आपके लिए बहुत जल्द मिलने वाली जीत तय कर दी है। (48: 27)
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