Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: सामाजिक विषय: धीरज [सब्र] से काम लेना:
सामाजिक विषय:
धीरज [सब्र] से काम लेना:
(स्वयं में सुधार लाने के लिए) सब्र [धैर्य] और नमाज़ से मदद लो ----- हालांकि यह (नमाज़) किसी के लिए भी सचमुच बहुत कठिन चीज़ है, मगर उन लोगों के लिए (मुश्किल) नहीं, जिनके दिल (अल्लाह के आगे) झुके होते हैं, (2: 45)
ऐ ईमानवालो! तुम जब (मेरी) मदद माँगा करो, तो धैर्य [सब्र] और नमाज़ के द्वारा (मदद) माँगा करो, क्योंकि अल्लाह सब्र [Patience] करने वालों के साथ होता है। (2: 153)
जो लोग अल्लाह के रास्ते में मारे जाएँ उन्हें मुर्दा न कहो; वे ज़िंदा हैं, हालाँकि तुम्हें (उनकी ज़िंदगी का) एहसास नहीं होता। (2: 154)
हम तुम्हारी परीक्षा ज़रूर लेंगे, (कभी) डर और भूख से, और (कभी) संपत्ति, जान, और पैदावार के नुक़सान से। मगर [ऐ रसूल], आप उन लोगों को ख़ुशख़बरी दे दें जो (मुसीबत में) धीरज के साथ जमे रहते हैं, (2: 155)
वे लोग जब किसी मुसीबत में घिर जाते हैं, तो कहते हैं, "हम तो अल्लाह के ही हैं, और हमको उसी के पास लौटकर जाना है।" (2: 156)
ये वह लोग हैं जिन पर उनके रब की ख़ास कृपा [Blessings] और रहमत [Mercy] होगी, और यही लोग हैं जो सीधे व सही रास्ते पर हैं। (2: 157)
आपके माल और आपके लोगों के ज़रिए आपकी परीक्षा ज़रूर ली जाएगी, और यह बात पक्की है कि जिन्हें आपसे पहले किताब दी गई थी और जो (अरब के) लोग अल्लाह के साथ दूसरों को जोड़ते हैं, उनसे आपको बहुत-सी ऐसी बातें सुननी पड़ेंगी जो दिल को चोट पहुँचाने वाली होंगी। अगर आप सब्र के साथ जमे रहें और अल्लाह से डरते हुए बुराइयों से बचते रहें, तो वह बड़ी हिम्मत व पक्के इरादे की बात होगी। (3: 186)
और (सबूत के तौर पर) उन्होंने यूसुफ़ की क़मीज़ दिखायी, जिस पर चकमा देने के लिए (किसी भेड़िए के) ख़ून के धब्बे लगा दिए गए थे। उनके बाप याक़ूब ने (रोते हुए) कहा, "नहीं, (यह सच नहीं!), बल्कि तुम्हारे जी ने तुम्हें ग़लत काम करने को उकसाया है! अब मेरे लिए सबसे बेहतर यही है कि मैं सब्र करूं: जो बात तुम बता रहे हो, उसे बर्दाश्त करने के लिए बस अल्लाह ही की मदद चाहता हूँ।" (12: 18)
(सारी बातें सुनने के बाद) उनके बाप ने कहा, "नहीं, बल्कि (यह चोरीवाली बात) ऐसी है कि ख़ुद तुम्हारे दिलों ने एक झूठी बात बना ली है! ख़ैर! अब सबसे बेहतर यही है कि मैं धीरज से काम लूँ: बहुत सम्भव है कि अल्लाह उन सब (भाइयों) को मेरे पास ले आए----वही तो है जो सब जानता है, सारा ज्ञान रखता है।" (12: 83)
अतः (ऐ रसूल) आप सब्र से काम लें: और आपको सब्र केवल अल्लाह ही की मदद से मिलेगा। उनके हाल पर दुखी न हों और न उनकी विरोधी चालों से मायूस हों, (16: 127)
क्योंकि अल्लाह उनके साथ है जो उसका डर रखते हुए बुराइयों से बचते हैं और अच्छा काम करते रहते हैं। (16: 128)
तो (ए रसूल!), आप धीरज से काम लें, जो आपके लिए बहुत अच्छा होगा। (70: 5)
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