Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: सामाजिक विषय: क़सम खाना [Oath]

 सामाजिक विषय:


क़सम खाना [Oath]:


[ईमानवालो], अल्लाह के नाम से ऐसी क़समें खा लिया करो जो तुम्हें किसी के साथ भलाई करनेबुराइयों से बचने की कोशिश करनेऔर लोगों के बीच समझौता करा देने से रोक ले। अल्लाह सब कुछ सुनतासब जानता है:  (2: 224)


अल्लाह तुमसे उन क़समों का हिसाब नहीं मांगेगाजो तुमने बिना सोचे-समझे यूँ ही खा ली होलेकिन वह उन क़समों का ज़रूर हिसाब लेगा जो तुमने दिल में सोच-समझकर खायी होगी। अल्लाह बड़ा माफ़ करनेवालासहनशील है।  (2: 225)

 

अल्लाह के नाम से अगर कोई प्रतिज्ञा करो, तो उसे पूरा किया करो  और (इसी तरह) अगर किसी चीज़ की पक्की शपथ ले लो तो उसे मत तोड़ो, क्योंकि तुम अल्लाह को अपना गवाह बना चुके हो: अल्लाह हर एक चीज़ जानता है जो कुछ तुम करते हो। (16: 91)


 तुम अपनी क़समों का इस्तेमाल एक दूसरे को धोखा देने के लिए मत किया करो----(प्रतिज्ञा करके अपने ही हाथों मत तोड़ दो, और) उस औरत की तरह हो जाओ जो अपना सूत मेहनत से कातने के बाद उसे उधेड़कर धागा-धागा अलग कर देती है---केवल इसलिए कि एक गिरोह दूसरे गिरोह से गिनती ताक़त में बढ़ गया। बात केवल यह है कि अल्लाह इस प्रतिज्ञा के द्वारा तुम्हारी परीक्षा लेता है और जिस बात पर तुम आपस में मतभेद रखते हो, उसकी सच्चाई तो वह क़यामत के दिन अवश्य ही तुम पर खोल देगा। (16: 92)

 

अल्लाह तुम्हारी उन क़समों के लिए तुम से हिसाब नहीं लेगा जो बे सिर-पैर की हों, हाँ जो क़सम सोच समझकर खायी गयी हो, उन पर ज़रूर तुम्हारी पकड़ होगी: अगर क़सम तोड़नी पड़े तो उसकी भरपाई [atonement] इस तरह होगी कि तुम्हें दस ग़रीब लोगों को खाना खिलाना होगा जैसा कि तुम आमतौर से अपने घर के लोगों को खिलाते हो, या उन्हें कपड़े देना होगा या एक ग़ुलाम को आज़ाद करना होगा ----- अगर कोई आदमी की हैसियत यह सब करने की हो, तो उसे चाहिए कि वह तीन दिन तक रोज़े रखे। यही तुम्हारी क़समों को तोड़ने की भरपाई है---- (याद रखो) जब क़सम खा लो, तो उसे पूरा किया करो। इस तरह से अल्लाह अपनी आयतों को तुम्हारे सामने स्पष्ट करता है, ताकि तुम उसका शुक्र अदा करनेवाले बनो। (5: 89)

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