Posts

Showing posts from September, 2022

Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: सामाजिक विषय: धन की बर्बादी करना और कंजूसी करना:

  सामाजिक विषय: धन की बर्बादी और कंजूसी :   ऐ आदम की सन्तान! जब कभी तुम इबादत किया करो , तो अच्छी तरह कपड़े पहना करो , और (हलाल चीज़ें) खाओ पियो , मगर (ख़र्च करने में) हद से आगे न बढ़ो: बिना सोचे-समझे , बेकार की चीज़ों में पैसे उड़ाने वालों को अल्लाह पसन्द नहीं करता। ( 7: 31 ) और (देखो!) अपना हाथ न तो इतना सिकोड़ लो कि गर्दन में बँध जाए (कि किसी को कुछ न दो) और न उसे बिल्कुल खुला छोड़ दो (कि सब कुछ लुटा बैठो) , कि फिर तुम्हारी निंदा हो और तुम दुख में घिर जाओ। ( 17: 29 )   ( अच्छे लोग) वे हैं जो जब ख़र्च करते हैं , तो न फ़ज़ूल-ख़र्ची करते हैं , और न ही कंजूसी से काम लेते हैं , बल्कि वे इनके बीच एक संतुलन बनाए रखते हैं ; ( 25: 67 )

Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: सामाजिक विषय: प्रतिज्ञा [Vows] करना

  सामाजिक विषय: प्रतिज्ञा [Vows] करना:    और (देखो!) दान के लिए तुम जो कुछ भी दो ,  या मन्नत के रूप में जो ख़र्च करो ,  अल्लाह उसे अच्छी तरह जानता है ,  और जो लोग (दिखावे का) ग़लत काम करते हैं ,  उन्हें मदद करने वाला कोई न होगा।   ( 2: 270 )   उनमें से कुछ लोगों ने अल्लाह के सामने यह कहते हुए वचन दिया था कि , " अगर अल्लाह अपने फ़ज़ल से कुछ हमें देगा , तो हम ज़रूर दान करेंगे , और नेक व अच्छे बनकर रहेंगे" ,  ( 9: 75 ) मगर जब अल्लाह ने उन्हें अपने फ़ज़ल से सचमुच दे दिया , तो वे उसमें कंजूसी करने लगे और अपने वचन से फिर गए।   ( 9: 76 )   क्योंकि उन लोगों ने अल्लाह से किए गए वादे को तोड़ डाला , वह सारे झूठ जो वे बोलते रहे , इन सबके नतीजे में अल्लाह ने उनके दिलों में ' पाखंड ' [Hypocrisy] को उस दिन तक के लिए बैठा दिया , जिस दिन कि वे अल्लाह से मिलेंगे।   ( 9: 77 )   फिर (हज में आए हुए) लोगों को चाहिए कि साफ़-सुथरे हो जाएं , अपनी मन्नतें पूरी करें और इस पुराने घर [काबा] का (सात बार) चक्कर [तवाफ़] लगाएं।" ( 22: 29 ) ...

Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: सामाजिक विषय: शिष्टाचार [Etiquette]:

  सामाजिक विषय: शिष्टाचार [Etiquette]: जब कभी उनके पास किसी मामले की ख़बर पहुँचती है , चाहे वह शांति से जुड़ी बात हो या युद्ध से , तो वे उसे (तुरंत) लोगों में फैलाने लगते हैं ; हालाँकि अगर वे उस (ख़बर) को अल्लाह के रसूल और उनमें जो लोग अधिकार रखते हैं , उनके पास ले जाते , तो उन लोगों ने मामले की जाँच-पड़ताल से सच्चाई जान ली होती। अगर तुम पर अल्लाह का फ़ज़ल और उसकी रहमत [ mercy] न होती , तो थोड़े लोगों के सिवा तुम सब शैतान के पीछे चलने लग जाते। ( 4: 83 )   ऐ ईमान रखनेवालो! , अगर (सही रास्ते से भटका हुआ) कोई बदमाश , तुम्हारे पास कोई ख़बर लेकर आए , तो पहले उसकी छानबीन कर लिया करो , कहीं ऐसा न हो कि तुम दूसरों को अनजाने में नुक़सान पहुँचा बैठो , और फिर अपने किए पर पछताते रहो ,  ( 49: 6 ) ऐ ईमान रखनेवालो! , मर्दों के एक गिरोह को दूसरे (गिरोह के) मर्दों की हँसी नहीं उड़ानी चाहिए , हो सकता है कि (जिनकी हँसी उड़ा रहे हैं) , वे उनसे बेहतर हों , और औरतों के गिरोह को भी दूसरे (गिरोह की) औरतों की हँसी नहीं उड़ानी चाहिए , हो सकता है कि (जिनकी हँसी उड़ायी जा रही हो) वे उनसे बेहतर हों ...

Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: सामाजिक विषय: घर के अंदर आने की इजाज़त [अनुमति] लेना:

  सामाजिक विषय: घर के अंदर आने की इजाज़त [अनुमति] लेना: ऐ ईमानवालो , तुम्हारे ग़ुलामों और तुममें   से वह बच्चे जो अभी युवावस्था को नहीं पहुँचे हैं , उनको चाहिए कि दिन के तीन समयों में तुम्हारे पास आएं तो अनुमति लेकर आया करें: सुबह की नमाज़ से पहले ; दोपहर की गर्मी के वक़्त जब तुम (आराम के लिए) अपने कपड़े उतारकर रखते हो ; और रात की नमाज़ के बाद। ये तीन समय तुम्हारे लिए (पर्दे में) अकेले रहने के हैं ; इसके अलावा दूसरे वक़्तों में तुम पर या उनपर कोई गुनाह नहीं है अगर तुम एक दूसरे के यहाँ बिना किसी रोक-टोक के आते जाते हो। तो (देखो) , अल्लाह इस तरीक़े से अपने संदेशों को स्पष्ट करता है: अल्लाह सब कुछ जाननेवाला , ( और अपने काम में) बहुत समझ-बूझ रखनेवाला है। (24: 58 ) जब तुम्हारे बच्चे युवावस्था को पहुँच जाएँ , तो उन्हें भी चाहिए कि अंदर आने से पहले (हमेशा) अनुमति लिया करें , जैसा कि उनसे बड़े लेते हैं। इस प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी आयतों को स्पष्ट करता है। अल्लाह सब कुछ जाननेवाला , ( और अपने काम में) बहुत समझ-बूझ रखनेवाला है। (24: 59 ) बड़ी बूढ़ी औरतें जिन्हें अब निकाह करन...

Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: सामाजिक विषय: धीरज [सब्र] से काम लेना:

  सामाजिक विषय : धीरज [ सब्र ] से काम लेना : ( स्वयं में सुधार लाने के लिए ) सब्र  [ धैर्य ]   और नमाज़ से मदद लो  -----  हालांकि यह ( नमाज़ ) किसी के लिए भी सचमुच बहुत कठिन चीज़ है ,  मगर उन लोगों के लिए ( मुश्किल ) नहीं ,  जिनके दिल ( अल्लाह के आगे ) झुके होते हैं , (2: 45 )   ऐ ईमानवालो ! तुम जब ( मेरी ) मदद माँगा करो ,  तो धैर्य [ सब्र ] और नमाज़ के द्वारा ( मदद ) माँगा करो ,  क्योंकि अल्लाह सब्र [ Patience]  करने वालों के साथ होता है।   (2: 153 ) जो लोग अल्लाह के रास्ते में मारे जाएँ उन्हें मुर्दा न कहो ;  वे ज़िंदा हैं ,  हालाँकि   तुम्हें ( उनकी ज़िंदगी का ) एहसास नहीं होता।   (2: 154 ) हम तुम्हारी परीक्षा ज़रूर लेंगे , ( कभी ) डर और भूख से ,  और ( कभी ) संपत्ति ,  जान ,  और पैदावार के नुक़सान से। मगर [ ऐ रसूल ] ,  आप उन लोगों को ख़ुशख़बरी दे दें जो ( मुसीबत में ) धीरज क...