Thematic Quran: हलाल और हराम खाना [Lawful and forbidden Food]:
हलाल और हराम खाना [Lawful and forbidden Food]:
ऐ लोगो! ज़मीन में जितनी भी अच्छी और हलाल [lawful] चीज़ें हैं उन्हें खाओ (और अपने वहम से खाने की चीज़ों से लोगों को न रोको), और शैतान के रास्ते पर न चलो, क्योंकि वह तुम्हारा खुला दुश्मन है। (2: 168)
ऐ ईमानवालो! जो अच्छी चीज़ें अल्लाह ने तुम्हारे लिए वैध [हलाल] कर दी हैं, उन्हें 'हराम'[अवैध/forbidden] न ठहरा लो ----- (रोक-टोक में) हद से आगे न बढ़ो : अल्लाह हद पार करनेवालों को पसंद नहीं करता. ------ (5: 87)
[ऐ रसूल!], वे आपसे पूछते हैं कि "क्या क्या चीज़ें उनके खाने के लिए हलाल [lawful] हैं?" कह दें, "सारी अच्छी चीज़ें तुम्हारे लिए हलाल हैं." (इनमें वह भी शामिल हैं) जिन शिकारी चिड़ियों और जानवरों को तुमने शिकार पकड़ने के लिए सधा रखे हों, फिर जैसे अल्लाह ने तुम्हें सिखा दिया है, उन्हें भी सिखा दो, अत: वे जिस जानवर को (शिकार कर के) तुम्हारे लिए बचाए रखें, उसको (बिना झिझक) खा सकते हो, मगर (शिकारी जानवर को शिकार के लिए छोड़ते हुए) अल्लाह का नाम ले लिया करो। अल्लाह (के हुक्म को न मानने के नतीजे) से डरते रहो : (याद रहे) अल्लाह (कर्मों का) हिसाब लेने में बहुत तेज़ है।" (5: 4)
ऐ ईमानवालो! अपने (धार्मिक) दायित्वों [obligations] को पूरा करो। मवेशी चौपाये (का मांस) खाना तुम्हारे लिए वैध [हलाल/ lawful] कर दिया गया है, सिवाए उनके जो तुम्हें आगे बताया जा रहा है. (याद रहे), जब तुम हज/ उमरे की (तीर्थ) यात्रा पर रहो, तो (इहराम की हालत में) शिकार करना तुम्हारे लिए वैध नहीं [हराम] है------- अल्लाह जैसा चाहता है, आदेश देता है, (5: 1)
[मुसलमानो!], तुम्हारे लिए (खाने की) ये चीज़ें हराम [Forbidden] कर दी गयी हैं: मरे हुए जानवर का (सड़ा-गला) मांस; ख़ून; सूअर का मांस, कोई भी जानवर जिस पर (काटते समय) अल्लाह को छोड़कर किसी और का नाम लिया गया हो; कोई भी जानवर जिसका गला घोंटकर मारा गया हो, या ज़ोरदार चोट खाकर मर गया हो, या ऊँचाई से गिरकर या सींग लगने से मरा हो या जिसे किसी हिंसक पशु ने फाड़ खाया हो--- मगर हाँ, वह (हराम नहीं) जिसे (मरने से पहले) तुमने (सही तरीक़े से) ज़बह कर लिया हो; या (किसी जानवर का मांस) जो मूर्तिपूजकों के बलि देने की जगह पर काटा गया हो, हराम है। तुम्हारे लिए यह भी हराम किया जाता है कि लोगों के बीच (मांस के) हिस्सों का बंटवारा निशान लगी हुई जुए की तीरों से किया जाए----- यह बड़े गुनाह की रीति है ----(5:3)
[मुसलमानो!], तुम्हारे लिए (खाने की) ये चीज़ें हराम [Forbidden] कर दी गयी हैं: मरे हुए जानवर का (सड़ा-गला) मांस; ख़ून; सूअर का मांस, कोई भी जानवर जिस पर (काटते समय) अल्लाह को छोड़कर किसी और का नाम लिया गया हो; कोई भी जानवर जिसका गला घोंटकर मारा गया हो, या ज़ोरदार चोट खाकर मर गया हो, या ऊँचाई से गिरकर या सींग लगने से मरा हो या जिसे किसी हिंसक पशु ने फाड़ खाया हो--- मगर हाँ, वह (हराम नहीं) जिसे (मरने से पहले) तुमने (सही तरीक़े से) ज़बह कर लिया हो; या (किसी जानवर का मांस) जो मूर्तिपूजकों के बलि देने की जगह पर काटा गया हो, हराम है। तुम्हारे लिए यह भी हराम किया जाता है कि लोगों के बीच (मांस के) हिस्सों का बंटवारा निशान लगी हुई जुए की तीरों से किया जाए----- यह बड़े गुनाह की रीति है ----(5:3)
[ऐ रसूल!] उनसे कह दें, "जो कुछ मुझ पर 'वही' [Revelation] द्वारा भेजा गया है, उसमें तो मैंने कोई चीज़ ऐसी नहीं पायी जो लोगों के खाने के लिए मना [हराम] हो, सिवाय इसके कि वह मरे हुए जानवर का सड़ा-गला मांस हो, या बहता हुआ ख़ून हो या सुअर का मांस हो ----कि ये गंदी (नापाक) चीज़ें हैं---- या वह (बलि चढ़ा हुआ) गुनाह का जानवर हो, जिसपर अल्लाह के बदले किसी और का नाम लिया गया हो।" "लेकिन अगर कोई भूख के मारे (इन चीज़ों को खाने पर) मजबूर हो जाए, और वह ऐसा जान-बूझ कर न करे और न ही भूख मिटाने से ज़्यादा खाए, तो फिर अल्लाह बहुत माफ़ करनेवाला, बेहद दयावान है।" (6:145)
तुम्हारे लिए समंदर (में पाए जानेवाले) जीव का शिकार करना और उसका खाना वैद्ध [हलाल] है ---- तुम भी और दूसरे मुसाफ़िर भी इससे मज़े उठा सकते हैं ---- मगर (हज यात्रा में) जब तुम इहराम की हालत में हो, तो थल [land] का शिकार करना हराम है। अल्लाह (के हुक्म न मानने के नतीजे) से डरते रहो, जिसके पास तुम सबको इकट्ठा करके ले जाया जाएगा। (5: 96)
अतः [ऐ ईमानवालो!], जिस (जानवर को काटते समय) अल्लाह का नाम लिया गया हो, उसे बे हिचक खाओ, अगर तुम उसकी आयतों में विश्वास रखते हो. (6: 118)
तुम ऐसे जानवरों को क्यों नहीं खाते हो, हालाँकि जो कुछ उसने तुम्हें खाने से मना किया है, वह तो अल्लाह ने पहले ही विस्तार से बता दिया है, हाँ, अगर भूख से मजबूर हो जाओ, तो बात अलग है? लेकिन बहुत से लोग ऐसे हैं जो बिना पूरी जानकारी के, केवल अपनी इच्छाओं (ग़लत विचारों) के चलते दूसरों को सीधे रास्ते से भटका देते हैं। [ऐ रसूल!] आपका रब उन लोगों को भली-भाँति जानता है, जो मर्यादा तोड़ डालते हैं. (6: 119)
ऐसा कोई (जानवर) न खाओ, जिसपर अल्लाह का नाम न लिया गया हो, क्योंकि यह तो क़ानून तोड़ना होगा..... (6:121)
तुम्हारे लिए सारे चौपाए हलाल [lawful] कर दिए गए हैं, सिवाए उनके जिनके बारे में ख़ास तौर से मना किया गया है. मूर्तिपूजा से जुड़ी धारणाओं और रीतियों (जैसे चौपाया जानवरों को मूर्तियों पर बलि चढ़ाया जाना) की गन्दगी से बच कर रहो, और झूठी बातों से भी बचते रहो. (7: 30)
आज सारी अच्छी चीज़ें तुम्हारे लिए हलाल कर दी गयी हैं, जिन [यहूदी व ईसाई] लोगों को (तुम से) पहले (आसमानी) किताब दी गयी थी, उनका खाना तुम्हारे लिए हलाल है और तुम्हारा खाना उनके लिए हलाल है..... (5:5)
मगर जो कुछ अल्लाह ने हलाल और अच्छी रोज़ी तुम्हें दे रखी है, उन्हें (बेझिझक) खाओ और अल्लाह (की आज्ञा न मानने के नतीजे से) डरते रहो, जिसपर तुम ने विश्वास कर लिया है। (5: 88)
Halal and haram food teach us to follow Allah’s guidance in what we eat, keeping our body and soul pure. Reading surah kahf in roman english reminds us of the importance of obedience and self-control in every aspect of life.
ReplyDelete