Thematic Quran: प्रतिज्ञा/वचन को पूरा करना :





प्रतिज्ञा/वचन को पूरा करना :



अपनी प्रतिज्ञा [Pledge] पूरी किया करो : प्रतिज्ञा के विषय में तुम से अवश्य ही पूछा जाएगा. (17: 34)

अल्लाह के नाम से अगर कोई प्रतिज्ञा करो, तो उसे पूरा किया करो  और (इसी तरह) अगर किसी चीज़ की पक्की शपथ [Pledge] ले लो तो उसे मत तोड़ो, क्योंकि तुम अल्लाह को अपना गवाह बना चुके हो: अल्लाह हर एक चीज़ जानता है जो कुछ तुम करते हो. (16: 91)

तुम अपनी क़समों का इस्तेमाल एक दूसरे को धोखा देने के लिए मत किया करो----(प्रतिज्ञा करके अपने ही हाथों मत तोड़ दो, और) उस औरत की तरह न हो जाओ जो अपना सूत मेहनत से कातने के बाद उसे उधेड़ कर धागा धागा अलग कर देती है---केवल इसलिए कि एक गिरोह दूसरे गिरोह से गिनती व ताक़त में बढ़ गया। बात केवल यह है कि अल्लाह इस प्रतिज्ञा के द्वारा तुम्हारी परीक्षा लेता है और जिस बात पर तुम आपस में मतभेद रखते हो, उसकी सच्चाई तो वह क़यामत के दिन अवश्य ही तुम पर खोल देगा (16: 92)

(अरब के लोगों के साथ लेनदेन में ज़िम्मेदारी कैसे) नहींअल्लाह तो उन्हें  पसंद करता हैजो (किसी के साथ भी लेन-देन में) अपना वचन निभाते हैं और अल्लाह से डरते हुए बुराइयों से बचते हैं,  (3: 76)

(बाग़ी वे हैं) जो अल्लाह के आदेश को मानने की प्रतिज्ञा कर के उसे तोड़ डालते हैंजिन रिश्तों के जोड़ने का अल्लाह ने आदेश दिया है उसे काट डालते हैंजो मुल्क में फ़साद फैलाते हैंयही हैं जो घाटे में रहेंगे।  (2: 27)

नेकी व भलाई (का रास्ता) केवल यह नहीं है कि तुम (नमाज़ पढ़ने के वक़्त) अपने मुँह पूरब या पश्चिम की ओर कर लो। सही मायने में नेक व अच्छे लोग तो वह हैं जो अल्लाह पर और अन्तिम दिन पर विश्वास रखते हैं, (इसी तरह) फ़रिश्तों पर, (अल्लाह की) किताबों परऔर (अल्लाह के) नबियों पर ईमान रखते हैंजो अपने धन में से कुछ हिस्साचाहे उस माल से उनका कितना ही लगाव क्यों न होरिश्तेदारोंअनाथोंग़रीबों, (ज़रूरतमंद) मुसाफ़िरों और भीख माँगनेवालों को देते हैंऔर (ग़ुलामों को) आज़ाद कराने के लिए भी देते हैंवह लोग जो पाबंदी से नमाज़ पढ़ते हैंऔर निर्धारित ज़कात [alms] देते हैंऔर वे जब कभी वचन देते हैंतो उसे पूरा करते हैं; जो अपना क़दम मज़बूती से जमाए रखते हैंचाहे तंगी होमुसीबत की घड़ी होऔर ख़तरे का समय होहर हाल में धीरज रखनेवाले हैं। ये वह लोग हैं जो (नेकी की राह में) सच्चे हैंऔर यही हैं जो (अल्लाह से डरते हुए) बुराइयों से बचनेवाले हैं।  (2: 177)

और जो अपने ऊपर किए गए भरोसे को और अपनी प्रतिज्ञा को ईमानदारी से निभाते हैं, और अपनी नमाज़ों को पाबंदी से व सही ढंग से अदा करते हैं, तो ऐसे ही लोग हैं जिन्हें विरासत में दिया जाएगा---- जन्नत का सबसे अच्छा बाग़ [फ़िरदौस], जो उनका अपना हो जाएगा, वे उसमें हमेशा के लिए रहेंगे. (23: 8--11)

[ऐ रसूल] जो लोग आपके साथ अपनी निष्ठा का वचन [बै'त] देते हैंवे असल में ख़ुद अल्लाह के साथ अपनी निष्ठा का वचन देते हैं-----(लोगों ने रसूल के हाथ पर अपना हाथ रखकर वचन दियातो) उनके हाथों के ऊपर अल्लाह का हाथ भी है-----और अगर  कोई अपना वचन तोड़ेगातो ऐसा कर के वह ख़ुद अपने आपको ही नुक़सान में डाल लेगा : तो जिस किसी ने अल्लाह के साथ अपना वचन निभायाउसे अल्लाह बहुत बड़ा इनाम देगा. (48: 10)

हाँमुशरिकों में से वे लोग जिन्होंने तुम्हारे साथ किए गए शांति-समझौते की शर्तों को सही ढंग से मानाऔर तुम्हारे विरुद्ध मुक़ाबले में किसी की सहायता नहीं की : तो उनके साथ हुए क़रार [Agreement] को निर्धारित अवधि ख़त्म होने तक पूरा करो। अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो उससे डरते हुए बुराइयों से बचते हैं. (9: 4)

ऐसे मुशरिकों [बहुदेववादियों] के साथ अल्लाह और उसके रसूल की कोई संधि कैसे हो सकती थीहाँमगर जिन लोगों के साथ आप ने पवित्र मस्जिद [काबा] के पास (हुदैबिया में) संधि की थीजब तक वे उस (संधि की शर्तों) पर क़ायम रहते हैंआप भी उन (शर्तों) पर क़ायम रहें;  अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो उससे डरते हुए ग़लत कामों से बचते हैं। (9: 7)

ऐ इसराईल की सन्तान! याद करो कि मैंने कैसी-कैसी नेमतें [bounty] तुम पर की थीं। और (देखो) तुम मुझसे ली गई प्रतिज्ञा को पूरा करोऔर मैं तुमसे की हुई प्रतिज्ञा को पूरा करूँगा : मैं ही हूं जिससे तुम्हें डरना चाहिए। (2: 40)

मगर उन लोगों ने अपने वचन तोड़ दिएतो फिर हम ने उन्हें (अपने से) दूर कर दियाऔर उनके दिल कठोर कर दिए। वे (उतारी गयी किताब के) शब्दों में हेर-फेर कर के उसके अर्थ को बिगाड़ देते हैंऔर जो चीज़ उन्हें याद रखने के लिए बोली गयी थीउसमें से एक बड़ा हिस्सा तो वे बिल्कुल भूल बैठे हैं : (ऐ रसूल) आप उनके कुछ लोगों को छोड़कर बाक़ी सारे लोगों में धोखा देने की प्रवृत्ति पाएंगे। आप इस पर ध्यान न देंऔर उन्हें माफ़ कर दें : अल्लाह उन्हें पसंद करता है जो अच्छा कर्म करते हैं।
(5: 13).

मगर जो लोग अल्लाह के नाम से किए गए पक्के क़रार को तोड़ डालते हैंअल्लाह ने जिन रिश्तों को जोड़ने का आदेश दियाउसे काट डालते हैं और जो ज़मीन में फ़साद पैदा करते हैं : वही हैं जिनके लिए (आख़िरत/Hereafter में) बहुत बुरा घर होगा ---- (13: 25)











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