Thematic Quran: झूठी बातें बोलना :
झूठी बातें बोलना :
अल्लाह उसे मार्ग नहीं दिखाता जो कभी शुक्र न अदा करता हो और बड़ा झूठा हो. (39: 3)
निश्चय ही अल्लाह उसको (सीधा) मार्ग नहीं दिखाता जो मर्यादा (की सीमा) लांघनेवाला और बड़ा झूठा हो. (40: 28)
आसमानों और ज़मीन की हर चीज़ अल्लाह के नियंत्रण व क़ाबू में है। जिस दिन वह (क़यामत की) घड़ी आ जाएगी, उस दिन झूठ पर जमे रहनेवाले भारी घाटा उठाएंगे. (45: 27)
उन (पाखंडियों) के दिलों में एक रोग है, जिसे अल्लाह ने और बढ़ा दिया है : झूठ बोलते रहने के कारण उन्हें दर्दनाक यातना होगी। (2: 10)
(और देखो!) ये लोग अल्लाह के लिए (बेटियों के रूप में) ऐसी बातें ठहराते हैं, जिसे ख़ुद अपने लिए पसन्द नहीं करते, जबकि वे ख़ुद अपनी ज़बान से सफ़ेद झूठ बोलते हैं कि सारी बेहतरीन चीज़ [बेटा] उन्हीं के हिस्से में आयी है । इस में कोई शक नहीं कि उनके हिस्से में तो (जहन्नम की) आग है : उस (आग) में ये सबसे पहले जानेवाले हैं. (16: 62)
तो फिर उस से बढ़कर बुरा व ग़लत आदमी कौन होगा जो अल्लाह के बारे में झूठी बातें गढता हो, और जब सच्चाई उसके सामने आ चुकी हो, तो वह उसे (झूठ समझ कर) मानने से इंकार कर देता हो? क्या (सच्चाई से) इंकार करनेवालों का (उचित) ठिकाना जहन्नम नहीं है? (39: 32)
क़यामत के दिन आप [ऐ रसूल], उन लोगों को देखेंगे जिन्होंने अल्लाह के ख़िलाफ झूठी बातें गढी थीं, कि उनके चेहरे काले पड़ गए हैं। क्या अहंकारियों का ठिकाना जहन्नम नहीं है?" (39: 60)
सो तबाही है उन लोगों के लिए जो ख़ुद अपने हाथों से किताब लिखते हैं और (झूठा) दावा करते हैं कि "यह अल्लाह की तरफ़ से है", ताकि उसके द्वारा थोड़ा सा फ़ायदा कमा सकें। अफ़सोस उनपर जो कुछ उनके हाथों ने लिखा है! और अफ़सोस उनपर, जो कुछ उन्होंने इसके द्वारा कमाया है! (2: 79)
अब इससे ज़्यादा ग़लत काम और क्या हो सकता है, कि कोई अल्लाह के ख़िलाफ़ झूठी बातें गढ़े या उसकी आयतों को मानने से इंकार कर दे? जो लोग ऐसे ग़लत काम करते हैं, वे कभी फल-फूल नहीं सकेंगे। (6: 21)
उस आदमी से बढ़कर बदमाश कौन हो सकता है, जो अल्लाह के ख़िलाफ़ झूठी बातें गढ़ता हो, या यह दावा करता हो कि, "मुझ पर 'वही' [Revelations] उतरी है, जबकि असल में उसके पास कोई 'वही' नहीं भेजी गयी हो, या यह कहता हो, "मैं भी अल्लाह की 'वही' के बराबरी में कुछ उसी तरह की 'वही' उतार सकता हूँ। काश अगर आप देख पाते, कि मौत की सख़्ती में घिरे हुए अत्याचारियों का क्या हाल होता है, जब फ़रिश्ते उनकी तरफ़ अपने हाथ, यह कहते हुए बढ़ाते हैं, "अपनी रूहों को त्याग दो! अल्लाह के बारे में झूठी बातें बोलने और अपनी अकड़ में उसकी आयतों को ठुकरा देने के नतीजे में आज तुम्हें अपमानित करनेवाली यातना दी जाएगी।" (6: 93)
और अल्लाह के बारे में झूठी बातें गढ़ते हुए ऐसी ग़लत बातें मत कहा करो, "यह हलाल [Lawful] है और यह हराम [Forbidden] है" : जो लोग अल्लाह के बारे में झूठ गढ़ते हैं, वे कभी कामयाब नहीं होंगे---- (16: 116)
वे थोड़ा सा मज़ा (इस दुनिया में) उठा सकते हैं, मगर उन्हें (आख़िरत/Hereafter में) दर्दनाक यातना मिलने वाली है. (16: 117)
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