Thematic Quran: (अच्छे काम में) ख़र्च करने में कंजूसी करना :
(अच्छे काम में) ख़र्च करने में कंजूसी करना :
(ख़राबी और तबाही है उस आदमी के लिए भी) जो माल को जमा करता हो और गिन गिन कर रखता हो, (जायज़ और नाजायज़ माल का हिसाब किये बिना) (104: 2)
वह समझता है कि उसका माल उसे हमेशा ज़िन्दा बाक़ी रखेगा. (104: 3)
अल्लाह ने अपने फ़ज़ल से जिन लोगों को (माल) दे रखा है, उन्हें इसे ख़र्च करने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए, वे यह न समझें कि ऐसा करना उनके लिए कोई भलाई की बात है; उल्टा यह उनके लिए बहुत बुरा है। जो कुछ (माल) वे कंजूसी से बचा-बचा के रखते हैं उसे क़यामत के दिन उनकी गर्दनों के गिर्द लटका दिया जाएगा। (याद रहे!), वह अल्लाह ही है जो (अंत में) आसमानों और ज़मीन का अकेला वारिस होगा : हर चीज़ जो तुम करते हो,अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है। (3: 180)
हालांकि अब तुम्हें अल्लाह की राह में (थोड़ा-बहुत) देने के लिए बुलाया जा रहा है, मगर तुम में से कुछ लोग हैं जो देने में कंजूसी कर रहे हैं। हालाँकि जो कोई भी कंजूसी करता है तो वह असल में अपने आप से ही कंजूसी करता है : अल्लाह ही तो सारे धन-दौलत का स्रोत [source] है, और तुम तो ज़रूरतमंदों में से हो। अगर तुम ने मुंह मोड़ा, तो वह तुम्हारी जगह दूसरे लोगों को ले आएगा, और वे तुम्हारे जैसे (कंजूस) न होंगे। (47: 38)
और जिस किसी ने (अपने माल को अल्लाह के रास्ते में ख़र्च करने में) कंजूसी की, और अपने आप में ऐसा मगन रहा (जैसे उसे किसी की ज़रूरत नहीं),
और उसने अच्छाई की बात को मानने से इंकार किया----- तो हम उसे तकलीफ़ की मंज़िल [जहन्नम] तक पहुँचने के लिए रास्ता आसान कर देंगे
और जब वह तबाही (के गड्ढे) में गिरेगा तो उसका माल उसके किसी काम नहीं आएगा। (92: 8-11)
जो स्वयं कंजूसी करते हैं और दूसरे लोगों को भी कंजूसी करने पर उभारते हैं, और उन नेमतों को छिपाते हैं जो अल्लाह ने उन्हें दे रखा है, तो ऐसे नाशुक्रे लोगों के लिए हमने अपमानित कर देनेवाली यातना तैयार कर रखी है। (4: 37)
ईमानवालो, बहुत-से धर्मगुरु और संत-महात्मा ऐसे हैं जो ग़लत तरीक़े से लोगो के माल हड़प लेते हैं और लोगों को अल्लाह के मार्ग से दूर हटा देते हैं। (ऐ रसूल), जो लोग अल्लाह के रास्ते में ख़र्च करने के बजाए, सोना और चाँदी की जमाख़ोरी में लगे रहते हैं, आप उनसे कह दें कि उन्हें बड़ी दर्दनाक सज़ा होगी :
उस (क़यामत के) दिन जब (ज़ेवरों को) जहन्नम की आग में तपाया जाएगा, फिर उससे उनके माथों, पहलुओं और उनकी पीठों को दाग़ा जाएगा, फिर उनसे कहा जाएगा, "यही है वह जिसे तुमने अपने लिए जमा कर रखा था! जो कुछ तुम जमा करते रहे हो, अब उसका दर्द महसूस करो!" (9: 34--35)
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