Thematic Quran: दिखावे के लिए अच्छा काम करना :
दिखावे के लिए अच्छा काम करना :
[अल्लाह उन्हें भी पसंद नहीं करता] जो अपनी दौलत लोगों को दिखाने के लिए ख़र्च करते हैं, जो न अल्लाह पर विश्वास रखते हैं, और न ही अन्तिम दिन [क़यामत] पर. जिस किसी ने शैतान को अपना साथी बनाया, तो क्या ही बुरा साथी है वह! (4: 38)
ऐ ईमानवालो! तुम अपने दान व ख़ैरात को एहसान जताकर और (बातों से) चोट पहुँचाकर उस आदमी की तरह बर्बाद न करो, जो लोगों को बस दिखाने के लिए अपना माल ख़र्च करता है और अल्लाह और अंतिम दिन पर ईमान नहीं रखता। ऐसे आदमी की मिसाल उस चट्टान जैसी है जिसपर कुछ मिट्टी की तह जमी हुई हो (जिस पर कुछ पौधे उग आते हैं) : फिर जब ज़ोर की बारिश हुई (तो सब मिट्टी, पौधा बह गए और) एक साफ़ (और सख़्त) चट्टान के सिवा कुछ बाक़ी न रहा। ऐसे (दिखावा करनेवाले) लोगों को उनके (दान के) कामों के लिए कुछ भी इनाम नहीं मिलने वाला : अल्लाह (सच्चाई पर) विश्वास न करनेवालों को सीधा रास्ता नहीं दिखाता। (2: 264)
पाखंडी लोग अल्लाह को (और ईमानवालों को) धोखा देने की कोशिश करते हैं, मगर यह तो अल्लाह है जो उन्हें धोखे में पड़ा रहने देता है। जब वे नमाज़ के लिए खड़े होते है तो कसमसाते हुए, लोगों को दिखाने के लिए खड़े होते हैं, और अल्लाह को बस नाम के लिए ही याद करते हैं, (4: 142)
तो बस अफ़सोस (और ख़राबी है) उन नमाज़ पढने वालों के लिए (107: 4)
जिनका दिल असल में नमाज़ों में नहीं लगता; (कि सही नीयत से नमाज़ नहीं पढते, और कुछ पढते तो हैं मगर उनके दिल इंसानियत और ग़रीबों की सेवा भाव से बिल्कुल ख़ाली हैं) (107: 5)
वे लोग (इबादत) में दिखलावा करते हैं, (107: 6)
और (देखो!) उन लोगों की तरह न हो जाना जो अपने घरों से इतराते हुए निकलते थे, लोगों को अपनी शान दिखाते हुए, और दूसरों को अल्लाह के रास्ते से रोकते हुए------- जो कुछ वे करते हैं, अल्लाह को उसकी पूरी ख़बर है। (8: 47)
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