Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: अनदेखी चीज़ें : जन्नत [Paradise]

 

Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन


अनदेखी चीज़ें


जन्नत [Paradise] 



अपने रब की तरफ़ (गुनाहों की) माफ़ी के लिए जल्दी से बढ़ो, और उस जन्नत [बाग़] की तरफ़ भी बढ़ो जिसका फैलाव इतना है कि उसमें सारे आसमान और ज़मीन समा जाएं, और वह उन लोगों के लिए तैयार की गयी है जो अल्लाह से डरते हुए बुराइयों से बचते हैं,   (3: 133)


इसलिए तुम्हें चाहिए कि अल्लाह से माफ़ी मांगने में और जन्नत हासिल करने में तुम एक-दूसरे से बाज़ी ले जाने की कोशिश करो, वह जन्नत जो लम्बाई-चौड़ाई में आसमानों और ज़मीन के बराबर है, जो उन लोगों के लिए तैयार की गई है जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान रखते हों: यह अल्लाह का फ़ज़ल व करम (bounty) है, वह जिसे चाहता है, देता है। और अल्लाह के फ़ज़ल की कोई सीमा नहीं है। (57: 21)


[ऐ रसूल]जो लोग ईमान रखते हैं और उन्होंने अच्छे कर्म किएआप उन्हें ख़ुशख़बरी सुना दें कि उनके लिए ऐसे बाग़ होंगे जिनके नीचे नहरें बह रहीं होगी। जब भी उन बाग़ों में से कोई फल उन्हें रोज़ी के रूप में मिलेगातो वे कहेंगे, "यह तो हमें पहले भी दिया जा चुका है," क्योंकि उन्हें इससे मिलता-जुलता (फल दुनिया में) दिया गया था। उनके लिए वहाँ पाक-साफ़ मियाँ/बीवियाँ [spouses] होंगीऔर वे हमेशा वहाँ रहेंगे। (2: 25)


और जो लोग (हमारी आयतों पर) ईमान रखते हैं और अच्छे कर्म करते हैं, उन्हें हम ऐसे बाग़ों में दाखिल करेंगे, जिनके नीचे नहरें बह रहीं होगी, जहाँ वे हमेशा रहेंगे। उनके लिए वहाँ (मर्दों और औरतों के) पवित्र जोड़े होंगे, और हम उन्हें ठंडी तरोताज़ा छाँव में दाखिल करेंगे। (4: 57)


सचमुच जन्नतवाले लोग आज अपने पसंदीदा कामों में मगन होंगे,  (36: 55)

 वे लोग और उनके पति-पत्नियाँ घनी छाँव में तख़्तों पर तकिया लगाए हुए बैठे होंगे, (36: 56)

 उनके लिए वहाँ (हर तरह का) फल होगा, और वह सब कुछ मौजूद होगा जिसकी वे माँग करें। (36: 57)

 दया करनेवाले रब की तरफ़ से उन्हें सलामकहा जाएगा।  (36: 58)


हाँ, मगर अल्लाह के सच्चे व अच्छे बंदों की बात अलग है, (37: 40)

 उनके लिए जानी-पहचानी रोज़ी होगी ----  (37: 41)

 तरह-तरह के फल--- और उनको सम्मानित किया जाएगा,  (37: 42)

 आनंद से भरे बाग़ों [जन्नत] में;  (37: 43)

 वे तख़्तों पर आमने-सामने बैठे होंगे; (37: 44)

 एक बहते हुए सोते से भरी गयी शराब उनके बीच में घुमायी जाएगी: (37: 45)

 बिल्कुल सफ़ेद, पीनेवालों के लिए बहुत ही मज़ेदार होगी, (37: 46)

 न उससे सर में कोई भारीपन होगा और न मदहोशी में बहकना। (37: 47)

 और इनके साथ वहाँ औरतें होंगी-----शर्मीली व निगाहें नीची रखनेवाली, सुन्दर आँखोंवाली [हूरें] ---(37: 48)

 (उनका बेदाग़ हुस्न ऐसा होगा) मानो वे (धूल-गर्द से बचाए हुए शुतुर्मुर्ग़ के) साफ़ अंडे हों।  (37: 49)

 

हमेशा रहने के बाग़, जिनके दरवाज़े उनके लिए खुले होंगे।  (38: 50)

उनमें वे (आराम से) तकिया लगाए हुए बैठे होंगे; वे बहुत-से फल-मेवे और पीने की चीज़ें मँगवाते होंगे; (38: 51)

 और उनके पास निगाहें नीची रखनेवाली, बराबर उम्र की औरतें [हूरें] होंगी।  (38: 52)

 हिसाब-किताब के दिन [क़यामत] के लिए यही वह (नेमतों से भरी) चीज़ है, जिसका तुमसे वादा किया जाता है।  (38: 53)

 बेशक यह हमारी दी हुई चीज़ है, जो कभी ख़त्म नहीं होगी।  (38: 54)

 

(दूसरी तरफ़) वे लोग जिन्होंने अल्लाह का डर रखते हुए अपने आपको बुराइयों से बचाया होगावे सुरक्षित व अमनवाली जगह में होंगे, (44: 51)

बाग़ों और पानी के सोतों [springs] के बीच,  (44: 52)

महीन रेशम और गाढ़े ज़री के कपड़े पहने हुएएक-दूसरे के आमने-सामने बैठे होंगे: (44: 53)

ऐसा ही होगा! और हम बड़ी-बड़ी व काली आँखोंवाली हूरों से उनकी शादी कर देंगे। (44: 54)

वे वहाँ सुकून व इत्मिनान से (बैठे हुए) हर तरह के फल व मेवे मँगवा रहे होंगे। (44: 55)

 (दुनिया की) एक मौत के बादवहाँ (जन्नत में) वे मौत का मज़ा फिर कभी नहीं चखेंगे। अल्लाह उन्हें (जहन्नम की) आग की यातना से बचाए रखेगा,  (44: 56)

यह सब तुम्हारे रब की तरफ़ से इनाम [bounty] हैऔर (इंसान के लिए) यही सबसे बड़ी कामयाबी है।  (44: 57)

 

अल्लाह से डरते हुए बुराइयों से बचनेवाले बाग़ों [जन्नत] में और परम आनंद [Bliss] में होंगे,  (52: 17)

 उनके रब के दिए हुए तोहफ़े का मज़ा ले रहे होंगे: उस [रब] ने उन्हें भड़कती हुई आग की यातना से बचा लिया,  (52: 18) 

(उनसे कहा जाएगा), "ख़ूब मज़े से खाओ-पियो और मौज करो, ये इनाम है उन अच्छे कर्मों का जो तुम करते रहे थे।" (52: 19)

वे एक क़तार में लगे हुए तख़्तो पर तकिया लगाए हुए बैठे होंगे; हम बड़ी-बड़ी आँखोंवाली ख़ूबसूरत कुँआरी औरतों [हूरों] से उनका विवाह कर देंगे; (52: 20)


हम ईमान रखनेवाले लोगों के साथ उनकी सन्तान को भी (जन्नत में) साथ मिला देंगे, अगर संतान ने भी ईमान में अपने माँ-बाप का रास्ता अपनाया होगा (चाहे उनकी संतान के कर्म अपने माँ-बाप के कर्मों के स्तर के न भी हों) ---- हम उनके कर्मों के इनाम में से कुछ भी कमी नहीं करते: हर आदमी की जान अपने (अच्छे/ बुरे) कर्मों के बदले में गिरवी रखी हुई है ---- (52: 21)

 हम उन्हें कोई भी फल (मेवे) या गोश्त, जिसकी भी वे इच्छा करेंगे, देते रहेंगे।  (52: 22)

वे वहाँ आपस में (शराब ए तहूर के) प्याले हाथों-हाथ ले रहे होंगे, जिसके पीने से न कोई बेहूदा बातें होंगी और न कोई गुनाह। (52: 23)

 और उनकी सेवा में तन-मन से ऐसे नौजवान लगे हुए होंगे जो देखने में ऐसी मोतियों की तरह लगेंगे जिन्हें छुपाकर रखा गया हो, (52: 24) 


फिर जिस किसी को उसके कर्मों का लेखा-जोखा उसके दाहिने हाथ में दिया जाएगा तो वह (खुशी से) कहेगा, “लोगो, यह मेरे कर्मों का हिसाब है, आओ इसे पढ़ लो।  (69: 19)

मैं तो पहले से जानता था कि मुझे (अपने कर्मों के) हिसाब का सामना करना होगा,” (69: 20)

और इस तरह वह सुखी व मनपसंद ज़िंदगी गुज़ारेगा (69: 21)

(जन्नत के) उस ऊँचे बाग़ में, (69: 22)

 जिसके फलों के गुच्छे (लदे होने के कारण) झुके पड़े होंगे। (69: 23)

(उनसे कहा जाएगा): "खूब मज़े से खाओ और पियो उन (अच्छे कर्मों) के बदले, जो तुमने गुज़रे हुए (जीवन के) दिनों में किए थे।" (69: 24)

 

निष्ठावान और नेक बंदे (पाकीज़ा शराब के) ऐसे जाम पियेंगे जिसमें काफ़ूर [एक मीठा सुगंधित पौधा] की मिलावट होगी। (76: 5)

(ये जाम वहाँ) के एक बहते हुए सोते [spring] के होंगे जिससे ख़ुदा के ख़ास बंदे पिया करेंगे (और) जहां चाहेंगे (दूसरों को पिलाने के लिए) इसे छोटी नहरों के रूप में बहाकर (भी) ले जाएंगे। (76: 6)

(ये अल्लाह के वे ख़ास बंदे हैं) जो (अपनी) नज़रें [मन्नतें] (मान लेते हैं तो उसे) पूरी करते हैं, और उस दिन से डरते हैं जिसकी सख़्ती बड़ी व्यापक होगी। (76: 7)

और वे (अपना) खाना अल्लाह की मुहब्बत में (स्वयं खाने की चाहत रखने और भूखा  होने के बावजूद) ग़रीबों, अनाथों और क़ैदियों को खिला देते हैं। (76: 8)


(और कहते हैं कि): हम तो केवल अल्लाह की खुशी के लिए तुम्हें खिला रहे हैं, न तुम से बदले में कोई चीज़ हमें चाहिए और न (यह इच्छा है कि) तुम हमारा शुक्र अदा करो।"  (76: 9)

हमें तो अपने रब से उस दिन का डर रहता है जो (चेहरों को) बहुत काला (और) भद्दा कर देने वाला है। (76: 10)

सो अल्लाह उन्हें (अपना डर रखने के कारण) उस दिन की सख़्ती से बचा लेगा और उन्हीं (चेहरों पर) रौनक़ और ताज़गी और (दिलों में) मस्ती व खुशी भर देगा। (76: 11)

और (हमेशा) सब्र व धीरज (से नेक कामों पर डटे रहने) के बदले उन्हें (इनाम के तौर पर रहने को) जन्नत और (पहनने को) रेशमी कपड़े प्रदान करेगा। (76: 12)

वे उसमें तख़्तों पर तकिये लगाए बैठे होंगे, न वहाँ धूप की तेज़ गर्मी पाएंगे और न सर्दी की ठिठुरा देने वाली तेज़ी। (76: 13)

और (जन्नत के पेड़ों के) साये उन पर झुक रहे होंगे और उनके (फलों के) गुच्छे झुककर लटक रहे होंगे। (76: 14)

और (सेवक लोग) उनके आसपास चांदी के बर्तन और (साफ़-सुथरे) शीशे के गिलास लिए फिरते होंगे। (76: 15)

(और) शीशे भी चांदी की तरह के (बने) होंगे जिन्हें सेवकों ने (हर एक की ख़्वाहिश के अनुसार) ठीक-ठीक अनुपात में भरा होगा। (76: 16)

और उन्हें वहां (पाकीज़ा शराब के) ऐसे जाम पिलाए जायेंगे जिनमें सोंठ/अदरक (जैसी महक) की मिलावट होगी। (76: 17)

(वह शराब जन्नत) में सलसबीलनाम के एक सोते [spring] से बनी होगी। (76: 18) 

और उनके आसपास ऐसे सदाबहार नौजवान लड़के (सेवा में) घूमते रहेंगे कि जब आप उन्हें देखेंगे तो ऐसा लगेगा मानो वे बिखरे हुए मोती हों। (76: 19)

जब आप (जन्नत पर) नज़र डालेंगे तो वहां (बेशुमार) नेमतें और (हर तरफ़) बड़े  साम्राज्य के लक्षण दिखायी देंगे। (76: 20)

उन (के शरीरों) पर महीन रेशम के हरे और गाढ़े ब्रोकेड के कपड़े होंगे, और उन्हें चांदी के कंगन पहनाए जाएंगे और उनका रब उन्हें पवित्र शराब पिलाएगा। (76: 21) 

(उनसे कहा जाएगा): यह तुम्हारा इनाम है और (संसार में नेक राह पर चलने में की गयी) तुम्हारी मेहनत की सराहना की जाती है।“ (76: 22)


(इस दुनिया में) जो आदमी अपने रब के सामने (हिसाब-किताब के लिए) खड़े होने से डरता था, उसके लिए दो बाग़ होंगे। (55: 46)


तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे? (55: 47)

(दोनों बाग़) छायादार डालियोंवाले होंगे। (55: 48)


तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे? (55: 49)

उन (दोनो बाग़ों) में पानी के दो बहते हुए सोते [flowing spring] होंगे। (55: 50)

तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे? (55: 51)

और साथ में हर तरह के फल की दो-दो क़िस्में होंगी।  (55: 52) 

तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे? (55: 53)

 

[जन्नती लोग] गाढ़े रेशम के बिस्तर पर तकिया लगाए हुए बैठे होंगे, और दोनों बाग़ों के फल झुके हुए नज़दीक ही होंगे। (55: 54)

 तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे? (55: 55) 

उन्हीं (बाग़ों) में नज़रें बचाकर रखनेवाली (जवान) हसीनाएँ होंगी, जिन्हें उन (जन्नतियों) से पहले न किसी आदमी ने छुआ होगा और न किसी जिन्न ने। (55: 56)

तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे? (55: 57)


वे ऐसी होंगी मानो लाल [याकूत, Rubies] और चमकती मोतियाँ [मूँगा] हों! (55: 58)

 तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे? (55: 59)

 

अच्छाई का बदला अच्छाई के सिवा और क्या हो सकता है? (55: 60) 

तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे? (55: 61)

इन दोनों बाग़ों के नीचे (कुछ कम दर्जे के जन्नतियों के लिए) दो और बाग़ होंगे। (55: 62)

तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे? (55: 63)

दोनों बहुत ज़्यादा हरे-भरे होंगे; (55: 64)

तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे? (55: 65)

उन (दोनों बाग़ो) में दो उबलते हुए पानी के सोते [gushing spring] होंगे।  (55: 66)

तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे? (55: 67)

फलों से भरे हुए -खजूर और अनार के पेड़ होंगे। (55: 68)

तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे? (55: 69)

 

उनमें अच्छी स्वभाववाली कुँवारी हसीनाएँ होंगी। (55: 70)

 तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे? (55: 71)

काली-आँखोंवाली जवान हसीनाएं [हूरें] जो ख़ेमों [pavilions] में सँभालकर रखी गयी हैं। (55: 72) 

तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे? (55: 73)

जिन्हें उससे पहले न किसी आदमी ने हाथ लगाया होगा और न किसी जिन्न ने। (55: 74)

तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे?  (55: 75)

  

वे सभी हरे रेशमी गद्दों और बेहतरीन क़िस्म की क़ालीनों पर तकिया लगाए (बैठे) होंगे; (55: 76)

तो फिर, तुम दोनों अपने रब की किन किन नेमतों [Blessings] को मानने से इंकार करोगे? (55: 77)  

बहुत बरकतवाला [Blessed] नाम है तुम्हारे रब का, जो बड़े ही प्रतापवाला और उदारता से देनेवाला है।  (55: 78) 

 

और (तीसरे) जो सामने होंगे, वे तो हैं ही वरीयता में आगे चलने वाले! (56: 10)

यही वे लोग हैं जो अल्लाह के सबसे नज़दीक रहेंगे; (56: 11)

नेमत से भरी (परम आनंदवाली) जन्नतों में: (56: 12)

शुरू की पीढ़ियों में से तो बहुत-से होंगे, (56: 13)

किन्तु बाद की पीढ़ियों [later generations] में से कम ही (होंगे)। (56: 14)

ऊँचे तख़्तों पर जिस पर सोने के तारों से बुने हुए कपड़े (बिछे होंगे); (56: 15)

तकिया लगाए, आमने-सामने बैठे होंगे।  (56: 16)

सदा बहार नौजवान लड़के (उनकी सेवा में) उनके बीच घूमते रहेंगे,  (56: 17)

प्याले, (चमकते) जग और (पीने की) शुद्ध शराब से भरा हुआ जाम लिए हुए,  (56: 18)

जिस (के पीने) से न तो उन्हें सिर दर्द होगा और न उनके होश उड़ेंगे,  (56: 19)

(और वहाँ होंगे) हर एक फल जो वे पसन्द करें; 56: 20)

और चिड़ियों का मांस जो वे चाहें; (56: 21)

और (साथ निभाने के लिए) बड़ी आँखोंवाली ख़ूबसूरत (कुँवारी) हूरें!  (56: 22)

ऐसी मानो छिपाकर सुरक्षित रखे हुए मोती हों (56: 23)

यह सब कुछ उन (अच्छे) कामों के बदले में उन्हें मिलेगा, जो कुछ वे (दुनिया में) किया करते थे। (56: 24)

उस जन्नत में वे न कोई बेकार की बात सुनेंगे और न कोई गुनाह की बात; (56: 25)

हाँ जो बात होगी, वह बेहद अच्छी, साफ़-सुथरी और सलामती वाली होगी! (56: 26)



और जो दायीं हाथवाले होंगे [सौभाग्यशाली लोग], तो क्या कहना उन दायीं हाथवालों का! (56: 27)

(वे मज़े करेंगे) बिन काँटों के बेरियों में; (56: 28)

और गुच्छेदार केले से लदे पेड़ों में; (56: 29)

दूर तक फैली हुई छाँव में; (56: 30)

लगातार बहते हुए पानी में; (56: 31)

बहुत-सारे फलों व मेवों में  (56: 32)

जो न कभी ख़त्म होंगे और न उन्हें खाने की कोई रोक-टोक होगी (56: 33)

ऐसे जीवन-साथियों के साथ जिनकी तुलना नहीं हो सकती  (56: 34)

जिन्हें हमने ख़ास तौर से पैदा किया है --- (56: 35)

कुँवारियाँ,  (56: 36)

प्रेम दर्शानेवाली और उम्र में बराबर!---  (56: 37)

उन लोगों के लिए जो दायीं हाथवाले [सौभाग्यशाली] हैं, (56: 38)

(जिनमें) बहुत से शुरू की पीढियों से होंगे (56: 39)

और बहुत से बाद की पीढ़ियों से। (56: 40)

 

बुराइयों से बचनेवाले नेक लोगों से, जिस (जन्नत के) बाग़ का वादा किया गया है, उसकी तस्वीर कुछ ऐसी होगी: हमेशा साफ़ व शुद्ध रहनेवाली पानी की नहरें, हमेशा ताज़ा रहनेवाली दूध की नहरें, पीनेवालों के मज़े व मस्ती के लिए शराब की नहरें, साफ़ किए गए शुद्ध शहद की नहरें, सब उसके अंदर बह रही होंगी; उन्हें वहाँ हर तरह के फल मिलेंगे; और उन्हें अपने रब की तरफ़ से गुनाहों की माफ़ी मिल जाएगी। इनकी तुलना उन लोगों के अंजाम के साथ आख़िर किस तरह की जा सकती है, जो (जहन्नम की) आग में फँस के रह गए हों, और जिन्हें पीने के लिए ऐसा खौलता हुआ पानी मिलेगा, जो उनकी आँतों को फाड़कर रख देगा? (47: 15)


रहे वे लोग जो ईमान [विश्वास] रखते हैं, और अच्छे कर्म करते हैं, तो उनका रब उनके ईमान की वजह से उनको सही रास्ता दिखाएगा। वे नेमतों के बाग़ [जन्नत] में होंगे और उनके क़दमों तले नहरें बह रही होंगी। (10: 9)

उनकी दुआ वहाँ यह होगी, "महिमा है तेरी, ऐ अल्लाह (कि तू हर बुराई से पाक है!)", वे एक दूसरे से मिलने पर "सलाम" [सलामती हो] कहेंगे, और उनकी दुआओं का अन्त इस पर होगा, "सारी प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है जो सारे संसार का रब है।" (10: 10)


जो लोग अपने रब से डरते हुए बुराइयों से बचते थे, वे गिरोह के गिरोह जन्नत की ओर ले जाए जाएँगे, यहाँ तक कि जब वे वहाँ पहुँचेंगे तो पायेंगे कि उसके दरवाज़े पहले से खुले हैं। और उसके प्रहरी उनसे कहेंंगे, "सलाम हो तुमपर! बहुत अच्छे रहे! आओ, अंदर आ जाओ: तुम्हें अब यहीं सदैव रहना है” (तो उनकी ख़ुशियों का क्या हाल होगा!) (39: 73)

और वे कहेंगे, "सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमारे साथ अपना वादा सच कर दिखाया, और हमें इस ज़मीन का वारिस बनाया कि हम जन्नत में जहाँ चाहें वहाँ रहें-बसे।" अतः क्या ही अच्छा इनाम [reward] है नेकी के रास्ते में मेहनत करने वालों का! (39: 74)


वे हमेशा रहने के बाग़ [जन्नत] में ख़ुद भी दाख़िल होंगे और साथ में उनके बाप-दादा, उनके पति/पत्नियों और उनकी सन्तानों में से जो नेक होंगे, वे भी (वहाँ जगह पाएंगे); वहाँ हर दरवाज़े से फ़रिश्ते उनके पास आएंगे, (13: 23)

(और कहेंगे) "चूँकि तुमने (दुनिया में) धीरज व सब्र से काम लिया था, इसलिए (आज) तुम पर सलामती हो!" तुम्हारा घर तुम्हारे लिए क्या बेहतरीन इनाम है!  (13: 24)

 

मगर जो लोग ईमान रखते थे और उन्होंने अच्छे कर्म किए थे, उन्हें ऐसे बाग़ों में लाया जाएगा जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी, अपने रब के हुक्म से वे उनमें हमेशा के लिए रहेंगे: वहाँ (हर तरफ़ से) उनका अभिवादन 'तुम पर सलामती होकी दुआ से होगा। (14: 23)


रहे वे लोग जिन पर ख़ास करम हुआ है, तो वे लोग तो जन्नत में होंगेवे उसी में रहेंगे, उस समय तक जब तक कि आसमान और ज़मीन क़ायम हैं, और जब तक कि आपका रब ही कुछ दूसरी बात न चाहे------यह एक ऐसा उपहार है, जो कभी ख़त्म न होगा। (11: 108)


मगर जो सच्चे व अच्छे [मुत्तक़ी] लोग हैं, वे तो बाग़ों और बहते हुए पानी के सोतों [spring] के बीच (आराम से) होंगे---- (15: 45)

(उनसे कहा जाएगा), "सलामती के साथ बेधड़क (इन बाग़ों में) दाख़िल हो जाओ---- " (15: 46)

उनके दिलों से हम उनके मन-मुटाव निकाल देंगे: वे तख़्तों पर भाइयों की तरह आमने-सामने बैठे होंगे। (15: 47) 

न तो वहाँ उन्हें कभी कोई थकान महसूस होगी और न उन्हें कभी वहाँ से बाहर निकाला जाएगा।”  (15: 48)

 

[ऐ रसूल!] (क़यामत का) एक दिन आएगा जब आप ईमान रखनेवाले मर्दों और औरतों को देखेंगे कि उनकी रौशनी उनके आगे-आगे और उनके दाहिने तरफ़ फैल रही होगी। (उनसे कहा जाएगा),  "आज तुम्हारे लिए बड़ी अच्छी ख़बर यह है कि तुम (जन्नत के) ऐसे बाग़ों में हमेशा रहोगे, जिनके नीचे नहरें बहती हैं, असल में यही सबसे बड़ी कामयाबी है!" (57: 12)


वे उसमें तख़्तों पर तकिये लगाए बैठे होंगे, न वहाँ धूप की तेज़ गर्मी पाएंगे और न सर्दी की ठिठुरा देने वाली तेज़ी। (76: 13)


लेकिन, जब नेक व सच्चे लोगों से पूछा जाता है, "तुम्हारे रब ने क्या उतारा है? "वे कहेंगे, "सारी चीज़ें जो अच्छी हैं।" जो लोग अच्छा काम करते हैं, उनके लिए तो इस दुनिया में भी अच्छा बदला है, मगर आख़िरत [परलोक] में उनका घर कहीं अच्छा है: नेक व सच्चे लोगों का क्या ही अच्छा घर होगा। (16: 30)

 वे हमेशा-के-लिए रहने के बाग़ में दाख़िल होंगे, जिनके बीच बहती हुई नहरें होंगी, वे जो कुछ चाहेंगे, वहाँ हर एक चीज़ मौजूद होगी। अल्लाह अपने अच्छे बंदों को इसी तरह इनाम देता है, (16: 31)

 ऐसे (परहेज़गार) लोग जिनकी जान फ़रिश्ते इस हालत में लेते हैं जबकि वे (ईमान व मन की शांति के कारण) ख़ुशहाल होते हैं। फ़रिश्ते उन्हें कहते हैं, "तुम पर सलामती हो! जन्नत में दाख़िल हो जाओ, यह उन कामों का इनाम है जो तुम किया करते थे।" (16: 32)

 

रहे वे लोग जो ईमान रखते हैं और अच्छे कर्म करते हैं---- तो जिस किसी ने भी अच्छा कर्म किया, उसके कर्मों के इनाम [reward] को हम कभी बेकार नहीं जाने देते---(18: 30)

उनके लिए परम आनंद के सदाबहार बाग़ होंगे जहाँ नहरें बह रही होंगी। वहाँ उन्हें सोने के कंगनों से सजाया जाएगा। वहाँ वे हरे रंग के महीन रेशम और ज़री के कपड़े पहनेंगे और ऊँचे (गद्देदार) तख़्तों पर तकिया लगाए बैठे होंगे। क्या ही अच्छा इनाम है! कितनी हसीन जगह है आराम करने की! (18: 31)

 

मगर जो लोग ईमान रखते हैं और उन्होंने अच्छे कर्म किए, तो अल्लाह उन लोगों को ऐसे बाग़ों में दाखिल करेगा जिनके नीचें नहरें बह रही होंगी; वहाँ वे सोने के कंगनों और मोतियों से सजाए जाएँगे; उनके पहनने के लिए वहाँ रेशमी कपड़ा होगा।  (22: 23)

उन्हें ऐसी बात की तरफ़ ले जाया गया था जो अच्छी व पाकीज़ा बात थी, और उन्हें ऐसे रास्ते पर चलाया गया था जो उस (ख़ुदा) का रास्ता है जो सारी तारीफ़ों के लायक़ है। (22: 24)


(दूसरी तरफ़) वे लोग जिन्होंने अल्लाह का डर रखते हुए अपने आपको बुराइयों से बचाया होगावे सुरक्षित व अमनवाली जगह में होंगे, (44: 51)

बाग़ों और पानी के सोतों [springs] के बीच,  (44: 52)

 महीन रेशम और गाढ़े ज़री के कपड़े पहने हुएएक-दूसरे के आमने-सामने बैठे होंगे: (44: 53)

 

उस दिन सभी दोस्त एक-दूसरे के दुश्मन होंगेमगर नेक व बुराइयों से बचनेवाले [मुत्तक़ी] लोगों को छोड़कर ---- (43: 67)

 (मुत्तक़ी लोगों के बारे में कहा जायेगा) "ऐ मेरे बन्दों! आज तुम्हारे लिए न तो कोई डर होगाऔर न तुम (किसी बात पर) दुखी होगे" ---- (43: 68

 वे लोग जिन्होंने हमारी आयतों (की सच्चाई) में विश्वास किया और पूरी भक्ति से अपने आपको हमारे सामने झुकाया,  (43: 69

 [उनसे कहा जाएगा], "तुम और तुम्हारे जोड़ीदार [मर्द/औरत, spouses] दोनोंजन्नत के अंदर दाख़िल हो जाओ! : तुम ख़ुशी से खिल उठोगे!" (43: 70

वहाँ [जन्नत में] उनके आसपास सोने की प्लेटें और प्याले घुमाए जाते रहेंगे औरदिल जिस चीज़ की भी इच्छा करे और आँखे जिससे ख़ुशी पाएँवह सब कुछ मौजूद होगा।वहाँ तुम हमेशा के लिए रहोगे:  (43: 71

यह है वह जन्नतजो तुम्हें दिया जाता हैऔर अब से यह तुम्हारा अपना हुआयह नतीजा है उन कर्मों का जो तुम (दुनिया में) किया करते थे,  (43: 72)

 तुम्हारे खाने के लिए वहाँ बड़ी मात्रा में फल होंगे।" (43: 73)

 

और (जन्नत के पेड़ों के) साये उन पर झुक रहे होंगे और उनके (फलों के) गुच्छे झुककर लटक रहे होंगे। (76: 14)

और (सेवक लोग) उनके आसपास चांदी के बर्तन और (साफ़-सुथरे) शीशे के गिलास लिए फिरते होंगे। (76: 15)

(और) शीशे भी चांदी की तरह के (बने) होंगे जिन्हें सेवकों ने (हर एक की ख़्वाहिश के अनुसार) ठीक-ठीक अनुपात में भरा होगा। (76: 16)

 

उनके दिलों से हम उनके मन-मुटाव निकाल देंगे: वे तख़्तों पर भाइयों की तरह आमने-सामने बैठे होंगे। (15: 47) 


वे तख़्तों पर आमने-सामने बैठे होंगे; (37: 44)


वे एक क़तार में लगे हुए तख़्तो पर तकिया लगाए हुए बैठे होंगे; हम बड़ी-बड़ी आँखोंवाली ख़ूबसूरत कुँआरी औरतों [हूरों] से उनका विवाह कर देंगे; (52: 20)

(एक तरफ़) बहुत से चेहरे उस दिन खिले हुए और चमकते हुए होंगे,    (75: 22)

और अपने रब (की नेमतों) को देख रहे होंगे,  (75: 23)

 

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