Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन : अंतिम घड़ी [Final Hour]: निशानियाँ

 Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन 


अंतिम घड़ी [Final Hour]


निशानियाँ [Signs]:


और जब याजूज [Gog] और माजूज [Magog] के लोगों को खुला छोड़ दिया जाएगा और वे हर ऊँची जगह से दौड़ते हुए नीचे को उतर आएंगे, (21: 96)


जब उन लोगों के ख़िलाफ़ फ़ैसला हो जाएगा, तब हम धरती में से एक जानवर सामने लाएँगे जो उन्हें बता देगा कि वे लोग हमारी आयतों पर विश्वास नहीं करते थे। (27: 82)


वह [क़ुरआन या ईसा का दोबारा आना] क़यामत की घड़ी की जानकारी देता है: अतः तुम उसके बारे में संदेह न करो। मेरी बात मानो कि यही सीधा रास्ता है; (43: 61)


विश्वास न करनेवाले लोग अब और किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं, सिवाय (क़यामत की) घड़ी का, जो उन पर इस तरह (अचानक) आ जाएगी कि उन्हें पता तक न होगा?  उस (क़यामत) की निशानियाँ तो आ चुकी हैं, मगर जब वह घड़ी सचमुच आ जाएगी, उस वक़्त नसीहत मान लेने का भला क्या फ़ायदा होगा? (47: 18)


क़यामत की घड़ी निकट आ पहुँची है; और चाँद दो टुकड़े हो गया।  (54: 1)

किन्तु उन (मक्का के काफ़िरों) का हाल यह है कि अगर वे कोई निशानी [चमत्कार] देखते हैं, तो मुँह मोड़ लेते हैं और कहते हैं, "यह तो वही पुराना जादू है जो पहले से चला आ रहा है!" (54: 2)

 

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