Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: अंतिम घड़ी [Final Hour] : क़यामत के नाम:
Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन
अंतिम घड़ी [Final Hour]
क़यामत के नाम:
(और) जो फ़ैसले के दिन का
मालिक है। (1: 4)
और वह लोग जो उस ['वही'/Revelation] पर ईमान रखते हैं जो [ऐ रसूल] आप पर उतारी
गयी, और उन पर भी (विश्वास रखते हैं) जो आपसे पहले उतारी जा चुकी
हैं, और (साथ ही) जो आनेवाली दुनिया [आख़िरत] की ज़िंदगी पर भी
पक्का विश्वास रखते हैं; (2: 4)
(और फिर) जब अल्लाह ने कहा, "ऐ ईसा! मैं तुझे (दुनिया से) वापस ले लूँगा और तुझे अपनी ओर उठा लूँगा: मैं तुझे विश्वास न करनेवालों (द्वारा दिए जाने वाले दर्द) से तुझे आज़ाद [पाक] कर दूँगा। तेरे मानने वालों को क़यामत के दिन तक उन लोगों से ऊँचा रखूँगा, जिन्होंने
विश्वास नहीं किया। फिर तुम सबको लौटकर मेरे ही पास आना है और फिर मैं तुम्हारे बीच उन बातों का फ़ैसला कर दूँगा, जिनके बारे में तुम मतभेद रखते हो। (3: 55)
[ऐ रसूल] आप उन्हें ‘पछतावे के दिन’ [Day of Remorse] से
सावधान कर दें, जब इन मामलों का फ़ैसला कर दिया जाएगा, मगर उनका हाल यह
है कि वे इन बातों पर ध्यान ही नहीं देते और उनको भुलाए बैठे हैं, और वे ईमान भी
नहीं रखते हैं। (19: 39)
किन्तु जिन लोगों को ज्ञान और ईमान दिया
गया था, वे कहेंगे, "अल्लाह के लिखे हुए रिकार्ड के मुताबिक़ तो तुम असल
में ‘दोबारा उठाए जाने के दिन’ तक (दुनिया में)
ठहरे रहे थे: यही तो है ‘ज़िंदा उठाए जाने का दिन’ [Day of Resurrection], मगर तुम तो समझते ही न थे।" (30: 56)
[उनसे
कहा जाएगा], “यह वही
फ़ैसले का दिन है जिसे तुम मानने से इंकार किया करते थे। (37: 21)
वह [अल्लाह] बहुत ऊँचे दर्जेवाला, सिंहासन का मालिक
है। वह अपने बन्दों में से जिसे चाहे, उस पर "वही" [Revelations] द्वारा
अपनी शिक्षाओं को भेजता है, ताकि वह मुलाक़ात के दिन [क़यामत] से (लोगों को)
सावधान कर दे, (40: 15)
(क़यामत की आने वाली) घड़ी की जानकारी केवल अल्लाह को ही है, और बिना उसकी जानकारी के न तो कोई फल
अपने शगूफ़े [कोष/ sheath] से निकलता है, न कोई मादा गर्भवती होती है, और न ही बच्चा जनती है। जिस दिन वह उन (काफ़िरों) से पूछेगा, "कहाँ हैं मेरी (ख़ुदायी के) साझेदार [Partner]?" वे जवाब देंगे, "हम तेरे सामने इस बात को स्वीकार करते हैं कि हममें से कोई
भी उन [गढ़े हुए साझेदारों] को देख नहीं पा रहा है": (41: 47)
अत: हमने आपकी ओर अरबी में यह क़ुरआन उतार भेजी है, ताकि आप केंद्रीय शहर [मक्का], और उसके आसपास रहने वाले लोगों को (बुरे
कर्मों के नतीजे से) सावधान कर दें। और उनको उस दिन की (ख़ास करके) चेतावनी दे दें, जिस (क़यामत के) दिन सबको इकट्ठा किया
जाएगा, जिसके आने में कोई सन्देह नहीं, जब एक गिरोह बाग़ [जन्नत] में जाएगा और
एक गिरोह (जहन्नम की) भड़कती हुई आग में। (42: 7)
और नरसिंघे [Trumpet] को
फूँक मारकर बजा दिया जाएगा: “यही है वह (क़यामत का) दिन, जिसकी (तुम्हें)
धमकी दी गई थी।” (50: 20)
जब आने वाली घड़ी [क़यामत] सामने आ जाएगी, (56: 1)
(एक दिन) जब वह तुम (सब) को जमा करेगा, उस ‘इकट्ठा किए जानेवाले दिन' [क़यामत] पर, जो "एक-दूसरे
के मुक़ाबले में हार-जीत का दिन (या एक दूसरे को नज़रअंदाज़ करने का दिन)"
[तग़ाबुन] होगा, तो जिसने अल्लाह पर ईमान रखा होगा, और अच्छे कर्म किए
होंगे, उनके गुनाहों को वह मिटा देगा: वह उन्हें ऐसे बाग़ों में
दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी, वहाँ वे हमेशा के लिए रहेंगे---- यही सबसे बड़ी
कामयाबी है। (64: 9)
वह घड़ी [Inevitable Hour] जो
ज़रूर आकर रहेगी (जिसकी सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता)! (69: 1)
फिर जब हर चीज़ पर छा जाने वाली आफ़त
[क़यामत] आ जाएगी, (79: 34)
फिर जब कानों को फाड़ देने वाली आवाज़ [क़यामत] आ जाएगी ----
(80: 33)
क्या [ऐ रसूल!] आपको (हर चीज पर) छा
जाने वाली घटना [क़यामत] की खबर पहुंची है? (88: 1)
(ज़मीन और आसमान की सारी कायनात को) "तोड़-फोड़कर रख देने वाली धमाकेदार
टक्कर!" (101: 1)
वह (हर चीज़ को) तोड़-फोड़कर रख देने वाली धमाकेदार टक्कर (की
घटना) क्या है? (101: 2)
और आपको क्या मालूम कि उस "धमाकेदार
टक्कर" का मतलब क्या है? (101: 3)
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