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Thematic Quran: ज़कात [दान] / Alms [Charity] देना :

ज़कात [दान] /  Alms [Charity]  देना : हमने उन सब (रसूलों/  Messengers ) को (लोगों का) नायक बनाया जो कि वे हमारे आदेश से लोगों को मार्ग दिखाते थे ,  और हमने उन्हें वही '  [revelation]  द्वारा   भलाई के काम करने ,  नमाज़ को पाबन्दी से अदा करने और (ग़रीबों को) ज़कात  [alms]  देने के लिए प्रेरित किया था : वे हमारे सच्चे व पक्के बंदे थे जो इबादत में लगे रहते थे . (21:   73) ( लोगो) ,  पाबंदी से नमाज़ पढ़ा करो , ( सही-सही) ज़कात  [Alms]  दिया करो ,  और रसूल की आज्ञा माना करो ,  ताकि तुम पर दया की जाए।  (24:  56 ) “ मैं अपनी रहमत  [mercy]  उन लोगों के हक़ में लिखूँगा जो बुराइयों से बचते हैं ,  और बराबर ज़कात  [charity]  देते है ;  और जो हमारी आयतों में विश्वास रखते हैं ; (7:   156 ) ( ईमानवाले वे हैं) जो नमाज़ को पाबंदी से अदा करते हैं ,  और (ज़रूरतमंदों को) ज़कात  [alms]  देते हैं ,  और आनेवाले जीवन [आख़िरत /   पर...

Thematic Quran: झूठी बातें बोलना :

झूठी बातें बोलना : अल्लाह उसे मार्ग नहीं दिखाता जो कभी शुक्र न अदा करता हो और बड़ा झूठा हो .    ( 39:   3 ) निश्चय ही अल्लाह उसको (सीधा) मार्ग नहीं दिखाता जो मर्यादा (की सीमा) लांघनेवाला और बड़ा झूठा हो .   ( 40 :  28 ) आसमानों और ज़मीन की हर चीज़ अल्लाह के नियंत्रण व क़ाबू में है। जिस दिन वह (क़यामत की) घड़ी आ जाएगी ,   उस दिन झूठ पर जमे रहनेवाले भारी घाटा उठाएंगे.  ( 45:   27 ) उन (पाखंडियों) के दिलों में एक रोग है ,  जिसे अल्लाह ने और बढ़ा दिया है : झूठ बोलते रहने के कारण उन्हें दर्दनाक यातना होगी।  ( 2:   10 ) (और देखो!) ये लोग   अल्लाह के लिए   ( बेटियों के रूप में)   ऐसी बातें ठहराते हैं ,  जिसे ख़ुद अपने लिए   पसन्द   नहीं करते ,  जबकि वे ख़ुद अपनी   ज़बान से सफ़ेद   झूठ बोलते   हैं कि सारी बेहतरीन चीज़ [बेटा] उन्हीं के हिस्से में आयी है । इस में कोई शक नहीं कि उनके हिस्से में तो (जहन्नम की)   आग है : उस    (आग) में ये सबसे पहले जा...

Thematic Quran: दिखावे के लिए अच्छा काम करना :

दिखावे के लिए अच्छा काम करना : [ अल्लाह उन्हें भी पसंद नहीं करता] जो अपनी दौलत लोगों को दिखाने के लिए ख़र्च करते हैं ,   जो न अल्लाह पर विश्वास रखते हैं , और न ही अन्तिम दिन [क़यामत] पर.   जिस किसी ने शैतान को अपना साथी बनाया , तो क्या ही बुरा साथी है वह! ( 4:  38 ) ऐ ईमानवालो! तुम अपने दान व ख़ैरात को एहसान जताकर और (बातों से) चोट पहुँचाकर उस आदमी की तरह बर्बाद न करो ,  जो लोगों को बस दिखाने के लिए अपना माल ख़र्च करता है और   अल्लाह और अंतिम दिन पर ईमान नहीं रखता। ऐसे आदमी की मिसाल उस चट्टान जैसी है जिसपर कुछ मिट्टी की तह जमी हुई हो (जिस पर कुछ पौधे उग आते हैं) :   फिर जब ज़ोर की बारिश हुई (तो सब मिट्टी ,  पौधा बह गए और) एक साफ़ (और सख़्त) चट्टान के सिवा कुछ बाक़ी न रहा। ऐसे (दिखावा करनेवाले) लोगों को उनके (दान के) कामों के लिए कुछ भी इनाम नहीं मिलने वाला : अल्लाह (सच्चाई पर) विश्वास न करनेवालों को सीधा रास्ता नहीं दिखाता।   ( 2:   264 ) पाखंडी लोग अल्लाह को (और ईमानवालों को) धोखा देने की कोशिश करते हैं ,  मगर यह...

Thematic Quran: प्रतिज्ञा/वचन को पूरा करना :

प्रतिज्ञा/वचन को पूरा करना : अपनी प्रतिज्ञा  [Pledge]   पूरी किया करो : प्रतिज्ञा के विषय में तुम से अवश्य ही पूछा जाएगा.  (17:   34 ) अल्लाह के नाम से अगर कोई प्रतिज्ञा करो ,   तो उसे पूरा किया करो    और   ( इसी तरह) अगर किसी चीज़ की पक्की शपथ  [Pledge]  ले लो तो उसे मत तोड़ो ,   क्योंकि तुम अल्लाह को अपना गवाह बना चुके हो: अल्लाह हर एक चीज़ जानता है जो कुछ तुम करते हो. (16:  91 ) तुम अपनी क़समों का इस्तेमाल एक दूसरे को धोखा देने के लिए मत किया करो----(प्रतिज्ञा करके अपने ही हाथों मत तोड़ दो ,   और) उस औरत की तरह न हो जाओ जो अपना सूत मेहनत से कातने के बाद उसे उधेड़ कर धागा धागा अलग कर देती है---केवल इसलिए कि एक गिरोह दूसरे गिरोह से गिनती व ताक़त में बढ़ गया। बात केवल यह है कि अल्लाह इस प्रतिज्ञा के द्वारा तुम्हारी परीक्षा लेता है और जिस बात पर तुम आपस में मतभेद रखते हो ,   उसकी सच्चाई तो वह क़यामत के दिन अवश्य ही तुम पर खोल देगा (16:  92 ) ( अरब के लोगों के साथ लेनदेन में ज़िम्मेदारी कैसे) ...