Thematic Quran: क़ुरआन के क़िस्से: हज़रत ज़करिया और यहया (अलै)
क़ुरआन के क़िस्से
हज़रत ज़करिया और यह्या [Zachariah & John] (अलै)/PBUH
[ऐ रसूल] यह आपके रब की उस रहमत [Mercy] का बयान है, जो उसने अपने बंदे ज़करिया [Zachariah] पर दिखायी थी, (19: 2)
उसी वक़्त ज़करिया ने अपने रब से यह कहते हुए दुआ की, "ऐ मेरे रब! तू अपने फ़ज़ल से मुझे नेक व अच्छी औलाद प्रदान कर : बेशक, तू हर दुआ का सुननेवाला है।" (3: 38)
जब उसने अपने रब को मन ही मन में (दबी आवाज़ से) पुकारा था, (19: 3)
"ऐ मेरे रब! मेरी हड्डियाँ कमज़ोर हो गई हैं, और मेरे सिर के बाल बुढापे से बिल्कुल सफ़ेद हो गए हैं, मगर ऐ रब!, कभी ऐसा नहीं हुआ कि मैंने तुझ से कोई दुआ माँगी हो और तू ने मेरी माँग पूरी न की हो : (19: 4)
मुझे अपने मरने के बाद अपने भाई-बन्धुओं की ओर से डर है (कि पता नहीं वे क्या करेंगे), और मेरी पत्नी तो बाँझ है। अतः तू मुझे अपने पास से एक उत्तराधिकारी [Successor] प्रदान कर----जो तेरी ओर से एक इनाम हो---- (19: 5)
जो मेरा भी वारिस [heir] हो और याक़ूब [Jacob] के वशंज का भी वारिस हो। और ऐ रब! उसे ऐसा बना देना कि (तू और तेरे बंदे) सब उसे पसंद करें।" (19: 6)
और ज़करिया [Zachariah] को भी याद करें, जब उसने अपने रब को पुकारा था, "ऐ मेरे रब! मुझे अकेला (बिना संतान के) न छोड़ दे, हालाँकि सबसे अच्छा वारिस तो तू ही है।" (21: 89)
फिर फ़रिश्तों ने ज़करिया को आवाज़ दी, जबकि वह इबादत की जगह [मेहराब] में खड़ा नमाज़ पढ़ रहा था, "अल्लाह, तुझे यह्या [John] (के पैदा होने) की ख़ुशख़बरी देता है, जो अल्लाह के कलमे [Words] (यानी ईसा) की पुष्टि करनेवाला होगा। वह लोगों का सरदार होगा और पवित्र होगा, नबी होगा, और नेक व अच्छे लोगो में से एक होगा।" (3: 39)
(जवाब मिला), "ऐ ज़करिया! हम तुझे एक लड़के (के पैदा होने) की ख़ुशख़बरी सुनाते हैं, जिसका नाम यह्या [John] होगा---- इससे पहले हमने किसी के लिए भी यह नाम नहीं चुना।" (19: 7)
उसने पूछा, "मेरे रब! मेरे यहाँ लड़का कैसे पैदा हो सकता है जबकि मैं बूढ़ा हो चुका हूँ, और मेरी बीवी बाँझ है?" (एक फ़रिश्ते ने) कहा, "ऐसा ही होगा : अल्लाह जो चाहता है, करता है।" (3: 40)
उसने (हैरान होकर) कहा, "मेरे रब! मेरे यहाँ लड़का कैसे हो सकता है! मेरी पत्नी बाँझ है और मैं बूढ़ा और बहुत कमज़ोर हो चुका हूँ?" (19: 8)
कहा गया, 'ऐसा ही होगा! तेरा रब कहता है, “यह मेरे लिए कोई मुश्किल बात नहीं, इससे पहले मैं ख़ुद तुझे पैदा कर चुका हूँ, हालाँकि (उस समय) तेरे वजूद का कोई अता-पता न था।"’ (19: 9)
उसने कहा, "मेरे रब, इस बारे में मुझे कोई निशानी बता दे।" (फ़रिश्ते ने) कहा, "तुम्हारे लिए निशानी यह होगी कि तुम तीन दिन तक किसी से भी कोई बातचीत नहीं करोगे, सिवाए इशारों से बात बताने के। (इस दौरान) अपने रब को ज़्यादा से ज़्यादा याद करो; और उसकी बड़ाई शाम के समय और सुबह सवेरे भी बयान करते रहो।" (3: 41)
इस पर ज़करिया ने कहा, "मेरे रब! मेरे लिए इस बारे में कोई निशानी ठहरा दे।" कहा, "तेरे लिए निशानी यह है कि तू तीन (दिन और) रात तक लोगों से बात न कर पाएगा।" (19: 10)
अतः वह इबादतगाह से बाहर निकलकर अपने लोगों के पास आया और (बिना मुँह से बोले हुए) उनसे इशारों में कहा कि सुबह शाम अल्लाह की बड़ाई का बखान करते रहो।" (19: 11)
अतः हमने उनकी दुआ क़बूल कर ली---- उन्हें यह्या [John] (जैसा बेटा) प्रदान किया, और उनकी पत्नी को (बाँझपन से) स्वस्थ कर दिया--- वे हमेशा ही नेक व अच्छे कर्मों को करने में पूरी लगन से तत्पर रहते थे। वे बड़े (मन के) लगाव के साथ और डरते हुए हमें पुकारा करते थे, और हमारे सामने (पूरी भक्ति से) झुके रहते थे. (21: 90)
उसके रब ने बड़ी ख़ुशी से उसे स्वीकार कर लिया और बड़े अच्छे माहौल में उसे [मरयम] परवान चढ़ाया; और ज़करिया [Zachariah] को उसके देखभाल की ज़िम्मेदारी दे दी। जब कभी ज़करिया उससे मिलने के लिए उसके हुजरे में जाता (जहाँ वह इबादत करती थी), तो उसके पास खाने-पीने की चीज़ें पाता। उसने पूछा, "ऐ मरयम! ये चीज़ें तुझे कहाँ से मिलती हैं?" उसने जवाब दिया, "यह अल्लाह की तरफ़ से है : अल्लाह जिसे चाहता है, बेहिसाब देता है।” (3: 37)
(हम ने कहा), "ऐ यह्या! अल्लाह की किताब को मज़बूती से थाम ले।" वह अभी छोटा लड़का ही था कि हमने उसे ज्ञान व समझ-बूझ दे दी थी, (19: 12)
और ख़ास अपने पास से दिल की नर्मी और मन की शुद्धि भी दे दी थी। सचमुच वह बड़ा परहेज़गार था, (19: 13)
अपने माँ-बाप की सेवा करनेवाला था, कड़े मिज़ाज का और आज्ञा न माननेवाला न था. (19: 14)
फिर फ़रिश्तों ने ज़करिया को आवाज़ दी, जबकि वह इबादत की जगह [मेहराब] में खड़ा नमाज़ पढ़ रहा था, "अल्लाह, तुझे यह्या [John] (के पैदा होने) की ख़ुशख़बरी देता है, जो अल्लाह के कलमे [Words] (यानी ईसा) की पुष्टि करनेवाला होगा। वह लोगों का सरदार होगा और पवित्र होगा, नबी होगा, और नेक व अच्छे लोगो में से एक होगा।" (3: 39)
"सलामती थी उस पर, जिस दिन वह पैदा हुआ और जिस दिन उसकी मृत्यु हो गयी, और सलामती होगी उस पर जिस दिन वह फिर से ज़िंदा उठाया जाएगा!" (19: 15)
Comments
Post a Comment