Thematic Quran: सच्चाई: (क) वास्तविक [Real]और अवास्तविक [Unreal] चीज़ों में अंतर

सच्चाई


(क)  वास्तविक [Real] और अवास्तविक [Unreal] चीज़ों में अंतर


1.  सही ज्ञान और भटकी हुई सोच में अंतर :


आँख से अंधा और आँखोंवाला बराबर नहीं होते, (35:19)

और अँधेरा और उजाला, (35: 20)

और छाया और धूप,  (35: 21)

और ज़िंदा और मरा हुआ बराबर है। निश्चय ही अल्लाह जिसे चाहता है (अपना संदेश) सुनाता है: तुम उन लोगों को नहीं सुना सकते, जो क़ब्रों में पड़े हों। (35: 22)


2.  पानी और झाग की मिसाल:

वह आसमान से पानी बरसाता है जिससे नदी-नाले अपनी-अपनी समाई के अनुसार भरकर बह निकलते हैं। पानी के बहाव के साथ नदी की सतह पर झाग की परतें जमा हो जाती हैं, ऐसा ही झाग तब भी उठता है जब ज़ेवर और औज़ार बनाने के लिए किसी धातु को आग में पिघलाया जाता है: अल्लाह इस तरीक़े से सच और झूठ की मिसाल बयान करता है ---- जो झाग है वह तो सूखकर ग़ायब हो जाता है, मगर जो कुछ आदमी के फ़ायदे की चीज़ है, वह बची रह जाती है ---- अल्लाह ऐसी ही मिसालें दिया करता है। (13:17)


3.  सच को  झूठ के साथ न मिला दो  

सच और झूठ को एक साथ मत मिला दिया करोया जानते-बूझते सच को छिपाया मत करो। (2: 42)


4.  इच्छाएं सच्चाई पर विश्वास करने को तय नहीं कर सकतीं

लेकिन सच्चाई अगर कहीं उनकी इच्छाओं के मुताबिक़ हो जातीतो आसमानज़मीन और वह सब जो इनमें हैसब बर्बाद हो जाते। हम उनके पास उनकी सीख के लिए (नसीहत का) संदेश लेकर आए हैंऔर वे हैं कि इस संदेश से मुँह मोड़ लेते हैं। (23: 71)


5.  सच्चाई झूठ को कुचल डालती है

नहींबल्कि (हक़ीक़त यह है कि) हम झूठ के ख़िलाफ़ सच्चाई से वार करते हैंऔर वह झूठ का सिर कुचल डालता है ---- और देखो झूठ कैसे पूरी तरह से मिट जाता है! अफ़सोस तुम (लोगों) पर! तुम (अल्लाह के बारे में) कैसी-कैसी बातें बनाते हो! (21:18)

 

 


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