Thematic Quran: इसरा और मेराज:

 

इसरा और मेराज:

काबा से बुराक़ पर बैठकर अल-अ‍क़्सा मस्जिद का सफ़र [इसरा]

और अक़्सा मस्जिद से सात आसमानों से होते हुए अल्लाह के सामने हाज़री के लिए उड़ान [मेराज]

महानता है उस [अल्लाह] की, जिसने अपने बन्दे [मुहम्मद] को रात के समय पवित्र मस्जिद [काबा] से उस दूरवाली मस्जिद [अक़्सा] तक की यात्रा करायी, जिसके चारों तरफ़ की जगह को हमने बरकत [blessing] दी है, (और यह यात्रा इसलिए करायी) ताकि हम उन्हें अपनी कुछ निशानियाँ दिखा दें: सचमुच वही है जो सब कुछ सुनता, सब कुछ देखता है। (17: 1)

जो कुछ उस (रसूल) ने देखाउनके दिल को इसे समझने में कोई धोखा नहीं हुआ; (53: 11)

फिर भी क्या तुम उनसे उस चीज़ पर झगड़ा करोगे, जिसे उन्होंने अपनी आँखों से देखा था?  (53: 12)

(सच्चाई यह है कि) वह उस (फरिश्ते) को दूसरी बार भी (मेराज के सफ़र में) देख चुके हैं:  (53: 13)

उस बेर के पेड़ [Lote tree] के किनारे जिसकी सीमा के आगे कोई नहीं जा सकता है ['सिदरतुल मुन्तहा'],  (53: 14)

'जन्नतुल मावा' [सुकूनवाले बाग़] के नज़दीक, (53: 15)

उस वक़्त बेर के पेड़ पर ऐसी अजीब चमक छाई हुई थी जिसकी न तो कल्पना की जा सकती है और न वर्णन! (53: 16)

(रसूल की) निगाह न तो इधर उधर बहकी और न हद से आगे बढ़ी, (53: 17)

और उन्होंने (वहाँ) अपने रब की कुछ बहुत बड़ी-बड़ी निशानियाँ देखीं। (53: 18)

 

[ऐ रसूल!] हम आपको बता चुके हैं कि मनुष्य जाति के बारे में आपके रब को हर एक चीज़ की जानकारी है। (मेराज के मौक़े पर रात की यात्रा के दौरान) वह झलक जो हमने आपको दिखायी, वह तो लोगों के लिए केवल एक आज़माइश थी, इसी तरह (जहन्नम का) वह मन्हूस पेड़ [ज़क़ूम] था जिसका ज़िक्र क़ुरआन में किया गया है। हम उन्हें (तरह तरह से) सावधान करते रहते हैं, मगर उन पर कोई असर नहीं पड़ता, बल्कि इससे तो उनकी बदतमीज़ी और बढ़ती जाती है।" (17: 60)

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