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Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: क़ुरआन की शिक्षाप्रद मिसालें [Parables]: विश्वास न करने वालों [Disbelievers] के कर्म:

  क़ुरआन की शिक्षाप्रद मिसालें [Parables] : विश्वास न करने वालों [Disbelievers] के कर्म : जो कुछ वे इस सांसारिक जीवन में ख़र्च करते हैं , वह सब बेकार हो जाएगा : उसकी मिसाल ऐसी है जैसे एक तेज़ बर्फ़ीली हवावाली आँधी आए और वह उन लोगों की खेती को बर्बाद कर जाए। ( याद रहे !) , अल्लाह ने उन पर ज़ुल्म नहीं किया , बल्कि ख़ुद यही लोग अपनी जानों पर ज़ुल्म करते रहे हैं। ( 3: 117 ) जिन लोगों ने अपने रब को मानने से इंकार [ कुफ़्र ] किया ,  उनके कर्मों का हाल उस राख के ढेर जैसा होगा ,  जिसे किसी तूफ़ानी दिन में हवा का तेज़ झोंका उड़ा ले जाता है : जो कुछ भी उन्होंने ( अपने कर्मों से ) हासिल किया होगा ,  उनमें से कुछ भी उनके हाथ न आएगा। यही है ( असल में ) गुमराही में बहुत दूर जा पड़ना !  (14: 18 ) मगर जो लोग विश्वास नहीं करते , उनके कर्म ऐसे हैं जैसे रेगिस्तान में मरीचिका ( mirage) हो : प्यासा आदमी यह सोचता है कि वहाँ पानी होगा , मगर जब वहाँ पहुं...

Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: क़ुरआन की शिक्षाप्रद मिसालें [Parables]: दान [Charity] और अनाज का दाना:

  क़ुरआन की शिक्षाप्रद मिसालें [Parables] : दान [Charity] और अनाज का दाना : जो लोग अल्लाह के रास्ते में अपना माल ख़र्च करते हैं ,  उनकी मिसाल ऐसी है जैसे अनाज के एक दाने से सात बालियाँ [ ears]  उग जाएं ,  और हर बाली में सौ - सौ दाने हों। अल्लाह जिस किसी को चाहता है ,  कई गुना बढ़ाकर देता है : अल्लाह के फैलाव की कोई सीमा नहीं ,  वह सब कुछ जाननेवाला है। ( 2: 261 )

Thematic Quran/ क़ुरआन का विषयवार अध्ययन: क़ुरआन की शिक्षाप्रद मिसालें [Parables]: तौरात [Torah] और इंजील [Gospel] में ईमानवालों की मिसाल:

  क़ुरआन की शिक्षाप्रद मिसालें [Parables] : तौरात [Torah] और इंजील [Gospel] में ईमानवालों की मिसाल : मुहम्मद ( सल .) अल्लाह के रसूल [ Messenger] हैं। जो लोग उनके पीछे चलनेवाले हैं , वे विश्वास न करनेवालों के प्रति सख़्त हैं और आपस में एक दूसरे के साथ रहम - दिल हैं। तुम उन्हें देखोगे कि अल्लाह के फ़ज़ल [ bounty] की तलाश में और उसकी ख़ुशी की चाहत में वे रुकू [ kneeling] और सज्दे [ Prostrating] में झुके रहते हैं : उनके चहरों पर सज्दे ( में बार - बार झुकने ) के कारण निशान पड़ जाते हैं। तौरात [ Torah] और इंजील [ Gospel] में उनके बारे में इसी तरह दर्शाया गया है : जैसे किसी बीज से कोंपल निकलती है , फिर वह मज़बूत होती है , फिर बढ़कर मोटी हो जाती है , फिर अपने तने पर इस तरह सीधी खड़ी हो जाती है कि उसे उगाने वाले देखकर बहुत ख़ुश हो जाते हैं। इस तरह , अल्लाह उन ( की तरक़्क़ी ) से विश्वास न करनेवालों [ काफ़िरों ] के दिल जलाता है ; जो लोग ईमान रखते हैं , और नेक व अच्...