Thematic Quran: क़यामत-I
Thematic Quran: क़यामत-I जिस चीज़ [क़यामत] का तुमसे वादा किया जाता है, उसे तो आना ही है, और तुम उसे टाल नहीं सकते। (6: 134 ) [ऐ रसूल!] कह दें, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! तुम अपनी जगह (अपने तरीक़े से) काम करते रहो, मैं अपना काम कर रहा हूँ। जल्द ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि आख़िरत [परलोक] में किस का अंजाम अच्छा रहा।" शैतानियाँ करनेवाले कभी फलते-फूलते नहीं। (6: 135 ) हमने आसमानों और ज़मीन को और वे सारी चीज़ें जो उनके बीच में हैं, उन्हें बिना किसी सही मक़सद के यूँ ही नहीं बना दिया है : और (क़यामत की) वह घड़ी तो अवश्य आ कर रहेगी, अतः [ऐ रसूल!] आप (उनके विरोध के बावजूद) उनके साथ अच्छा व्यवहार करते हुए उन्हें झेल लें। (15: 85 ) अतः [ऐ रसूल] आप एक सच्चे व सही दीन की भक्ति में मज़बूती से जमे रहें, इससे पहले कि अल्लाह की ओर से वह दिन आ जाए जिसे टाला न जा सके। उस दिन, मानव-जाति को अलग-अलग बाँट दिया जाएगा : (30: 43 ) तब भी, सच्चाई से इंकार करने पर अड़े हुए लोग [काफ़िर] यह कहते हैं कि "हम पर क़यामत की घड़ी कभी नहीं आएगी।" कह दें, "क्यों नहीं? मेरे रब की क़स...